मेरा जन्म यहीं हुआ...मेरे माता-पिता की यहीं हुई मौत, DDA ने 344 झुग्गियों पर चलाया बुलडोजर; बेघर लोगों का फूटा दर्द

दिल्ली में भीषण गर्मी के बीच गोविंदपुरी इलाके में डीडीए ने 344 झुग्गी बस्तियों पर बुलडोजर की कार्रवाई कर उन्हें ध्वस्त कर दिया। सरकार के इस एक्शन से सैकड़ों लोग बेघर हुए हैं। लोगों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उनका यहीं जन्म हुआ और उनके माता-पिता की यहीं मौत हुई। सरकार ने हमारे साथ नाइंसाफी की है। ऐसी भीषण गर्मी में हमारे सिर से छत छीन कर हमें सड़क पर खड़ा कर दिया गया।

दिल्ली : दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में बुधवार तड़के ‘भूमिहीन झुग्गी-झोपड़ी कैंप’ पर बुलडोजर चलने के बीच यहां रहने वाले परिवार अंधेरे में ही अपना थोड़ा-बहुत सामान समेटने में जुट गए। सूरज उगने तक राष्ट्रीय राजधानी की भीषण गर्मी में सैकड़ों लोग बेघर हो चुके थे। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने बताया कि डीडीए की अतिक्रमण की गई भूमि पर 344 झुग्गियों को ध्वस्त कर दिया गया और इनमें से अधिकांश झुग्गियों में लोग नहीं रहते थे। अदालत ने किसी भी कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई है। बेघर हुए लोगों ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए कहा कि सरकार ने हमें ऐसी भीषण गर्मी में हमारी छत छीनकर हमें बेघर कर दिया। ये नाइंसाफी है।

DDA Demolished Slum in  Govindpuri

बुलडोजर (फाइल फोटो)

क्या बोले पीड़ित?

निराश निवासियों में 45 वर्षीय सत्यवती भी शामिल है, जो एक घरेलू सहायिका के रूप में काम करती है। उसका जन्म और पालन-पोषण उसी कैंप में हुआ था, जो अब मलबे में तब्दील हो चुका है। सत्यवती ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि मेरा जन्म यहीं हु‍आ था। मेरे माता-पिता की मौत भी यहीं हुई थी। मैं अपने पति के साथ नहीं रहती। मैं अपनी 16 वर्षीय बेटी और बेटे की अकेले देखभाल करती हूं।

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