Artificial Rain in Delhi: दिल्ली में 53 साल बाद कृत्रिम बारिश का ट्रायल, फिर भी सूखी रही जमीन, क्या फेल हो गई क्लाउड सीडिंग?

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए 53 साल बाद आर्टिफिशियल रेन का ट्रायल किया गया। IIT कानपुर की मदद से बुराड़ी, करोल बाग और मयूर विहार जैसे इलाकों में यह प्रयोग हुआ, लेकिन मौसम में कम नमी के कारण बारिश नहीं हुई। रिपोर्ट के अनुसार, कृत्रिम बारिश से पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर में हल्की गिरावट दर्ज की गई।

Artificial Rain in Delhi: वायु प्रदूषण की मार झेल रही दिल्ली को राहत की सांस दिलाने के लिए मंगलवार को 53 साल बाद कृत्रिम बारिश कराने की कोशिश की गई। आईआईटी कानपुर की मदद से क्लाउड सीडिंग की गई। लेकिन मौसम ने साथ नहीं दिया और यह कोशिश पूरी तरह सफल नहीं हो पाई। बादलों में नमी बहुत कम होने के कारण बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग ने दिल्ली में बारिश के कोई संकेत दर्ज नहीं किए। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशिल रेन से पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर में हल्की कमी दर्ज की गई।

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कृत्रिम बारिश के ट्रायल के बावजूद नहीं हुई बारिश

न्यूज एजेंसी भाषा के अनुसार, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि दिल्ली सरकार ने आईआईटी-कानपुर के सहयोग से बुराड़ी, उत्तरी करोल बाग, मयूर विहार और बादली सहित दिल्ली के कुछ हिस्सों में परीक्षण किए। उन्होंने बताया कि अगले कुछ दिनों में इस तरह के और परीक्षण किए जाने की योजना है। बाद में शाम को सरकार ने एक रिपोर्ट में कहा कि कृत्रिम वर्षा के परीक्षणों से उन स्थानों पर अति सूक्ष्म कणों में कमी लाने में मदद मिली। राजधानी में इस प्रक्रिया को अंजाम दिया गया, जबकि परिस्थितियां इसके लिए आदर्श नहीं थीं। वहीं आईआईटी डायरेक्टर मनिंद्र अग्रवाल का कहना है कि बादलों में नमी कम होने के कारण दिल्ली में बरसात नहीं हो पाई।

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