दिल्ली : दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू के निर्देशानुसार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने रोहिणी और आसपास के क्षेत्रों को जलभराव से राहत दिलाने के लिए एक विशेष सफाई अभियान (डि-सिल्टिंग) को युद्ध स्तर पर पूरा किया है। रोहिणी के प्रमुख अंडरग्राउंड ट्रंक आउटफॉल ड्रेन की सफाई कर DDA ने ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता को पुनर्जीवित कर दिया है।
उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू (फोटो-@LtGovDelhi)
30 साल पुरानी पाइपलाइनों की सफाई
वर्ष 1995 से 1998 के बीच निर्मित यह ड्रेन रोहिणी सेक्टर-20, 21, 22 और 23 के साथ-साथ किराड़ी और बेगमपुर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों के लिए जीवन रेखा है। पिछले कई वर्षों से जमा गाद के कारण ये पाइपलाइनें लगभग पूरी तरह जाम हो चुकी थीं। DDA के आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान में 4.095 किलोमीटर लंबी ट्रंक ड्रेन और 16.50 किलोमीटर लंबी समानांतर पाइपलाइनों से 10,000 मीट्रिक टन से अधिक कचरा बाहर निकाला गया है।
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भूमिगत और बड़े व्यास (2200 मिमी) वाली पाइपलाइनों की जटिल संरचना के कारण पारंपरिक तरीकों से सफाई संभव नहीं थी। DDA ने इस चुनौती से निपटने के लिए हाई-कैपेसिटी सुपर सकर (Super Sucker) और जेटिंग मशीनों का सहारा लिया। पहले उच्च दबाव वाले पानी से गाद को ढीला किया गया और फिर शक्तिशाली वैक्यूम मशीनों द्वारा उसे बाहर निकाला गया, जिससे 75 निरीक्षण चैंबरों (Inspection Chambers) की कार्यक्षमता पूरी तरह बहाल हो गई है।
दिल्ली में 70% अधिक सफाई का रिकॉर्ड
DDA के इस मिशन मोड अभियान की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे दिल्ली क्षेत्र में इस वर्ष गाद निकालने की गति पिछले वर्ष के मुकाबले काफी अधिक रही है। जहाँ पिछले साल प्री-मानसून अभियान में 33,380 मीट्रिक टन गाद हटाई गई थी, वहीं इस वर्ष अब तक 57,000 मीट्रिक टन से अधिक गाद हटाई जा चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 70 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।
कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए DDA ने दिल्ली को छह प्रमुख जोन—पूर्व, दक्षिण, उत्तर, नरेला, रोहिणी और द्वारका—में विभाजित किया था। प्रत्येक जोन में विशेष योजना के तहत नियमित मॉनिटरिंग की गई। इस अभियान के पूरा होने से मानसून के दौरान रोहिणी वासियों को जलभराव की समस्या से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
