हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रामलीला मैदान में हुई रैली के बाद कथित शुद्धिकरण के मामले में पुलिस ने पहली FIR दर्ज की है। हल्द्वानी कोतवाली में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिवक्ता अंजू की शिकायत पर दर्ज FIR में जातिगत भेदभाव, सामाजिक अपमान और अनुसूचित जाति के व्यक्ति के प्रति घृणा एवं हीनता का भाव रखने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने SC/ST एक्ट की धारा के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच एसपी क्राइम डॉ. जगदीश चंद्र को सौंपी गई है। वहीं, कांग्रेस इस मामले में लंबे समय से FIR दर्ज करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही थी। FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस मामले की जांच और आरोपों से जुड़े तथ्यों को खंगाल रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद ‘शुद्धिकरण’ मामले में पहली FIR
कांग्रेस के सांसदों ने खोला मोर्चा
कांग्रेस के कई सांसदों और नेताओं ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सभा स्थल का कथित तौर पर ’शुद्धीकरण’ किए जाने के मामले में मंगलवार को संसद मार्ग थाने पहुंचकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। पार्टी के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित करीब 20 सांसद और कुछ नेता मंगलवार को संसद मार्ग थाने पहुंचे और इस मामले में शिकायत दी।
नैनीताल के एसएसपी मंजुनाथ टीसी ने एएनआई को बताया कि पुलिस को उत्तराखंड भर से 80 शिकायतें और याचिकाएं मिली हैं, जिनमें से 19 नैनीताल जिले से हैं, जिनमें इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। एसएसपी ने बताया कि शिकायतों की कानूनी जांच के बाद, सबसे पहले शिकायत दर्ज कराने वाली अंजू की शिकायत पर हल्द्वानी कोतवाली में मामला दर्ज किया गया है। जांच का जिम्मा राजपत्रित अधिकारी एसपी क्राइम जगदीश चंद्र को सौंप दिया गया है।
यह घटनाक्रम खरगे की रैली के बाद हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कथित 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कांग्रेस द्वारा परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री के आवास तक मार्च निकालने के एक दिन बाद सामने आया है। हालांकि, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बात से इनकार किया है कि उस स्थान पर जाति आधारित कोई शुद्धिकरण अनुष्ठान हुआ था।
“हल्द्वानी घटना के संबंध में, हम पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि किसी की जाति के आधार पर कोई शुद्धिकरण अनुष्ठान नहीं किया गया था। 'श्री राम सेना' एक स्वतंत्र संगठन है, और घटना से पहले या बाद में जारी की गई इसकी किसी भी प्रेस विज्ञप्ति या वीडियो में किसी विशिष्ट व्यक्ति या जाति के विरुद्ध कोई भी बात नहीं थी,” धामी ने कहा। उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई सबूत है, तो हमने उसे पेश करने के लिए कहा है; यदि ऐसा कोई कृत्य हुआ है, तो हम सख्त से सख्त कार्रवाई करेंगे।
धामी ने कांग्रेस पर इस मुद्दे के इर्द-गिर्द राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूरा देश और पूरा उत्तराखंड इस बात को समझता है कि वे किस तरह की राजनीतिक रणनीति गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसीलिए हमारी पार्टी के सदस्य आज राज्य भर में इकट्ठा होकर जनता को जागरूक कर रहे हैं और जागरूकता फैला रहे हैं; हमारे अनुसूचित जाति मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उन्हें बेनकाब करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
नैनीताल उच्च न्यायालय ने देहरादून निवासी बैजनाथ द्वारा हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' घटना की जांच की मांग वाली जनहित याचिका को भी खारिज कर दिया है। न्यायालय ने पुलिस की कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया और चल रही जांच में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कांग्रेस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ कथित शुद्धिकरण अनुष्ठान पर उनकी टिप्पणी के संबंध में दर्ज एफआईआर को वापस लेने की भी मांग की है ।
हल्द्वानी नगर कोतवाली पुलिस ने 30 अगस्त को वाल्मीकि समुदाय के सदस्य और श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास संगठन के पदाधिकारी अमित कुमार की शिकायत के बाद गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में 'शुद्धिकरण यज्ञ' के संबंध में गांधीजी की टिप्पणियों से अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाएं आहत हुईं। पुलिस ने मामले में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और बीएनएस के प्रावधानों का इस्तेमाल किया।
