CM Omar Abdullah: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक 3 जून, बुधवार को बुलाई है, जिसमें सामूहिक महत्व के मुद्दों" और "जनकल्याण से जुड़े विषयों" पर चर्चा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने सभी पार्टी विधायकों को व्यक्तिगत रूप से बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। यह बैठक 3 जून को सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री के गुपकर स्थित आवास पर आयोजित होगी।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (फाइल फोटो)
"बादल फटने की तरह फट पड़ना चाहते हैं"
6 मई को तंगमर्ग में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि वह "बादल फटने की तरह फट पड़ना चाहते हैं", लेकिन उन्होंने यह भी कहा था कि ईद के बाद वह खुलकर अपनी बात रखेंगे। इसी महीने की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) बहाल करने की मांग उठाई थी। इसके बाद वह विदेश यात्रा पर गए और लगभग दस दिन बाद लौटे।
"डूबते जहाज को बचाने की आखिरी कोशिश"
इस बीच जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा नेता सनील शर्मा ने प्रस्तावित बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मुख्यमंत्री की "डूबते जहाज को बचाने की आखिरी कोशिश" प्रतीत होती है। उन्होंने कहा, "पिछली बार उन्होंने उपमुख्यमंत्री के आवास पर रात्रिभोज का आयोजन किया था, जहां उनके बीच विवाद हो गया और मुख्यमंत्री को कश्मीर छोड़ना पड़ा। वह 15 दिनों तक नजर नहीं आए। यह पार्टी लगभग बिखर चुकी है और अब इसे संभालने की कोशिश की जा रही है।" विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के कुछ विधायक उमर अब्दुल्ला सरकार के कामकाज, कुछ मंत्रियों की कथित अक्षमता तथा मुख्यमंत्री द्वारा मंत्रिमंडल का विस्तार न करने और गैर-प्रदर्शनकारी मंत्रियों को न बदलने को लेकर नाराज हैं।
11 मई को की थी अमित शाह से मुलाकात
गौरतलब है कि सीएम उमर अब्दुल्ला ने 11 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर राज्य का दर्जा बहाल करने, शासन से जुड़े नियमों में सुधार और आरक्षण व्यवस्था को अधिक तर्कसंगत बनाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की थी। बताया जा रहा है कि इस बैठक का एजेंडा पहले से ही तय था, जिसमें जनकल्याण और प्रशासनिक सुधारों पर खास जोर दिया गया। आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव होने हैं, जिन्हें 18 महीने पुरानी सरकार के लिए एक अहम राजनीतिक परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
