मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को वाराणसी पहुंचकर बाबा विश्वनाथ के दरबार में मत्था टेका। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरे का उद्देश्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच धार्मिक पर्यटन, लघु उद्योग और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
सिंहस्थ की तैयारी के लिए मोहन यादव ने काशी से ली सीख
सिंहस्थ 2028 के लिए काशी मॉडल पर नजर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का गहन अवलोकन किया। उन्होंने विशेष रूप से तीर्थयात्री प्रबंधन प्रणाली, इंफ्रास्ट्रक्चर और क्राउड फ्लो डिजाइन पर अधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महाकाल लोक बनने के बाद पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था बदल गई है। इसी तरह काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद यहां भी बदलाव आया है। सभी लोगों को साथ मिलाकर विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। उन्होंने कहा कि हम बाबा महाकाल और काशी विश्वनाथ को लेकर योजनाओं-जानकारियों का आदान-प्रदान करेंगे। उज्जैन में होने वाले आगामी सिंहस्थ के लिए हम यहां के सफल प्रबंधन को अपनाना चाहते हैं।
धार्मिक पर्यटन और ODOP पर बनेगा साझा रोडमैप
सम्मेलन के दौरान डॉ. यादव ने 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की 'बनारसी साड़ी' और मध्य प्रदेश की 'चंदेरी-महेश्वरी साड़ी' जैसे उत्पादों के विपणन और लघु उद्योगों के विस्तार के लिए दोनों राज्य मिलकर काम करेंगे। उन्होंने घोषणा की कि दोनों राज्य धार्मिक पर्यटन की सुगमता और दर्शन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक एमओयू (MoU) भी साइन करेंगे।
सम्राट विक्रमादित्य की गौरव गाथा का मंचन
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि मध्य प्रदेश सरकार सम्राट विक्रमादित्य के विराट व्यक्तित्व पर शोध कर रही है। इसी कड़ी में 3, 4 और 5 अप्रैल को बाबा विश्वनाथ धाम के परिसर में एक विशाल महानाट्य का मंचन किया जाएगा, जिसमें लगभग 400 कलाकार हिस्सा लेंगे। यह आयोजन आधुनिक विधा के माध्यम से गौरवशाली इतिहास को जीवंत करने का एक प्रयास है।
केन-बेतवा और सोलर प्रोजेक्ट्स पर साथ
सहयोग की बात करते हुए डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि अब राज्यों के बीच कटुता का समय समाप्त हो चुका है और सौहार्द का युग है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश वर्तमान में 'केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना' और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे दोनों राज्यों की समृद्धि और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
