Pune Mumbai Expressway Missing Link: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 1 मई (महाराष्ट्र दिवस) को पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे के 13.3 किलोमीटर लंबे ‘मिसिंग लिंक’ खंड का उद्घाटन करेंगे। एमएसआरडीसी (MSRDC) अधिकारियों के अनुसार, इस मार्ग पर शुरुआती छह महीनों तक केवल कारों और बसों को ही चलने की अनुमति दी जाएगी। इसके चालू होने के बाद पुणे और मुंबई के बीच यात्रा का समय कम से कम 30 मिनट घटने की उम्मीद है, साथ ही दूरी में भी करीब 6 किलोमीटर की कमी आएगी। खास बात यह है कि इस नए हिस्से के इस्तेमाल के लिए किसी अतिरिक्त टोल का भुगतान नहीं करना होगा। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए मार्ग पर भारी वाहनों और खतरनाक सामग्री ले जाने वाले ट्रकों की आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा। ऐसे सभी वाहन फिलहाल पुराने घाट सेक्शन का ही इस्तेमाल करते रहेंगे। उ
पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे के मिसिंग लिंक का उद्घाटन जल्द (फोटो: MSRDC)
ट्रैफिक 70% तक कम होने की उम्मीद
अधिकारी ने इस फैसले के पीछे का कारण बताते हुए कहा कि घाट सेक्शन में ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं के लिए भारी वाहन बड़ी वजह बनते हैं। फरवरी में आदोशी सुरंग (Adoshi Tunnel) के पास एक हादसे में ज्वलनशील पदार्थ ले जा रहा कंटेनर पलट गया था, जिससे करीब 30 घंटे तक यातायात बाधित रहा था। उन्होंने आगे बताया कि एक्सप्रेसवे पर लगभग 70% यातायात कारों और बसों का होता है, जबकि भारी वाहनों की हिस्सेदारी करीब 30% है। ऐसे में ‘मिसिंग लिंक’ के शुरू होने से पुराने घाट मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव लगभग 70% तक कम होने की उम्मीद है, जिससे तीखे मोड़ों और खड़ी ढलानों से बचते हुए यात्रा अधिक सुगम और सुरक्षित बन सकेगी।
पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते निर्माण सामग्री की कमी
करीब छह साल से निर्माणाधीन यह परियोजना कई बार तय समयसीमा से पीछे रही, लेकिन इसके पूरा होने के बाद भीड़भाड़ वाले भोर घाट मार्ग पर सफर काफी आसान होने की उम्मीद है। अधिकारी के अनुसार, इस प्रोजेक्ट का वर्क ऑर्डर वर्ष 2019 में जारी किया गया था, हालांकि इसे असली गति कोविड-19 महामारी के बाद 2021 में मिली। शुरुआत में इसे पिछले दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन घाट क्षेत्र में भारी बारिश और तेज हवाओं जैसे प्रतिकूल मौसम के कारण काम बार-बार प्रभावित हुआ। उन्होंने बताया कि डामरीकरण (एस्फाल्टिंग) का कार्य भी देर से हुआ, जिसकी एक बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते निर्माण सामग्री की कमी रही। हालांकि अब जरूरी सामग्री की आपूर्ति बहाल हो चुकी है और शेष कार्यों को तेज गति से पूरा कर अप्रैल के अंत तक परियोजना को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
एशिया की सबसे लंबी सड़क सुरंगों में से एक
यह परियोजना दो सुरंगों से मिलकर बनी है, जिनकी लंबाई 8.9 किलोमीटर और 1.9 किलोमीटर है। अधिकारियों के मुताबिक, इसमें लगभग 8.92 किलोमीटर लंबी और 23.5 मीटर चौड़ी सुरंग एशिया की सबसे लंबी सड़क सुरंगों में से एक है। इसके अलावा, टाइगर वैली में करीब 650 मीटर लंबा केबल-स्टे ब्रिज भी बनाया गया है, जो 180 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित है। यही वजह है कि इसे एमएसआरडीसी की सबसे जटिल इंजीनियरिंग परियोजनाओं में गिना जा रहा है। वर्तमान में इस साइट पर लगभग 1,000 मजदूर काम में लगे हुए हैं।
जाम की समस्या का समाधान
नियमित रूप से यात्रा करने वाले लोगों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे लंबे समय से चली आ रही जाम की समस्या का समाधान बताया है। कई यात्रियों का कहना है कि यह नया मार्ग खासकर वीकेंड के दौरान बड़ी राहत देगा, जब लोनावला और घाट सेक्शन में ट्रैफिक काफी थकाऊ हो जाता है। एक यात्री ने कहा कि पुणे और मुंबई के बीच अक्सर आने-जाने वालों के लिए तेज और सुगम रास्ता यात्रा को काफी आसान बना देगा।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स
एमएसआरडीसी के अधिकारियों के अनुसार, 23.5 मीटर चौड़ाई वाली सुरंग के चलते यह परियोजना गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो सकती है। उन्होंने बताया कि आवश्यक निरीक्षण पूरे हो चुके हैं और जैसे ही इस मार्ग को आम लोगों के लिए खोला जाएगा, प्रमाणन मिलने की उम्मीद है। वहीं, इस परियोजना के तहत बनाए जा रहे केबल-स्टे ब्रिज का निर्माण कार्य एमएसआरडीसी द्वारा नियुक्त कंपनी Afcons Infrastructure Ltd कर रही है।
