उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने राजधानी लखनऊ में एक नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में कहा कि आने वाले छह महीनों में प्रदेश के एक लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी। लोकभवन में हुए इस कार्यक्रम के दौरान अलग-अलग सरकारी विभागों में चयनित 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। इनका चयन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की प्रक्रियाओं के जरिए हुआ है। 818 चयनित अभ्यर्थियों में आयुष विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं, कौशल विकास और उद्योग विभाग से जुड़े पद शामिल हैं।
यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ। (फोटो- PTI)
छह महीने में जारी होंगे एक लाख से ज्यादा नियुक्ति पत्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सरकारी भर्तियों का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने दावा किया कि पिछले करीब साढ़े नौ वर्षों में साढ़े नौ लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। अब अगले छह महीने के दौरान एक लाख से ज्यादा युवाओं को सरकारी सेवा में शामिल करने की तैयारी है। सीएम योगी ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। उनके मुताबिक आयोग और भर्ती बोर्ड राजनीतिक हस्तक्षेप से अलग रहकर परीक्षाएं करा रहे हैं और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने का प्रयास किया जा रहा है।
2015 के UPPSC मामले का भी जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में 2017 से पहले की समाजवादी पार्टी सरकार पर भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए। सीएम योगी ने बिना नाम लिए कहा कि जब सपा सरकार थी, तब उप्र लोकसेवा आयोग (उप्र पीएससी) के अध्यक्ष के तौर एक ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया गया था जो पद के काबिल ही नहीं था। इसके बाद अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा और युवाओं को सड़कों पर उतरकर यह कहना पड़ा कि इस व्यक्ति को उम्रकैद होनी चाहिए और उसे जेल के अंदर ही सड़ने देना चाहिए।दरअसल, अक्टूबर 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनिल कुमार यादव की UPPSC अध्यक्ष पद पर नियुक्ति रद्द कर दी थी। अदालत ने नियुक्ति को मनमाना और कानून के अनुरूप नहीं माना था। इस पीठ में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा शामिल थे। अदालत ने चयन प्रक्रिया में उम्मीदवार की उपयुक्तता और अन्य उपलब्ध उम्मीदवारों पर पर्याप्त विचार नहीं किए जाने की बात भी कही थी।
पिछली सरकार पर भर्ती व्यवस्था को लेकर आरोप
मुख्यमंत्री योगी ने 2017 के पहले की अखिलेश यादव के नेतृत्व की सपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि साल 2017 से पहले जिन लोगों ने नियुक्ति पत्रों के वितरण में गदर मचाई थी, उनसे कहना चाहता हूं कि नोट कर लें, आज से फिर नियुक्ति पत्र वितरित कर रहे हैं और अगले छह महीने के अंदर एक लाख से अधिक युवाओं को उप्र के अंदर सरकारी नौकरी देंगे। वे (विपक्ष) गिनती करें, हम (नौकरी) देते जाएंगे।
बिना नाम लिए अखिलेश शिवपाल के लिए कही ये बात
उन्होंने बिना नाम लिए सपा प्रमुख और उनके चाचा पर निशाना साधते हुए कहा, ’’अब नौकरियां ही नौकरियां हैं। और सोचो इन्हीं नौकरियों के लिए चाचा-भतीजे की जोड़ी बेखौफ होकर लूटपाट करने के लिए निकल पड़ती थी। आज वह उपदेशक की भूमिका में काम कर रहे हैं और 2027 के बाद उपदेशक भी नहीं रह पाएंगे।’
'विज्ञापन निकलते ही ठेके बांट दिए जाते थे'
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि पहले विज्ञापन निकलते ही ठेके बांट दिए जाते थे, विज्ञापन जारी होते ही धंधा शुरू हो जाता था। सीएम योगी ने आरोप लगाया कि सपा सरकार में जिन लोगों ने आवेदन नहीं किया था, उन्हें भी नियुक्ति पत्र वितरित कर दिए जाते थे।
योगी ने कहा कि जिन्होंने उप्र के युवाओं का नुकसान किया, यूपी जैसे उत्सव प्रदेश को उपद्रवग्रस्त बना दिया था, उन लोगों को यह राज्य कभी बर्दाश्त नहीं करेगा और कभी करना भी नहीं चाहिए। योगी ने पिछली सपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी बीमार मानसिकता और भ्रष्ट व भेदभावपूर्ण कार्यप्रणाली के कारण प्रदेश ’बीमारू’ राज्य बन गया था।
कई विभागों में हुई है भर्ती
शनिवार के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में अलग-अलग विभागों के चयनित अभ्यर्थी शामिल हुए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आयुष विभाग में 404, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में 357, कौशल विकास क्षेत्र में 48 और उद्योग विभाग में 9 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है।
