Chhattisgarh News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 134वें एपिसोड में छत्तीसगढ़ के बदलते बस्तर और युवाओं की उपलब्धियों को प्रमुखता से स्थान मिला। कार्यक्रम के दौरान अबूझमाड़ का जिक्र करते हुए बताया गया कि जिस क्षेत्र को कभी नक्सल गतिविधियों के लिए जाना जाता था, वहां अब लोग उत्साह के साथ विकास और सकारात्मक बदलाव की नई कहानी लिख रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ में मन की बात कार्यक्रम सुनते दिखे लोग
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा छत्तीसगढ़ के युवा धावक अनिमेष कुजूर और पंजाब के एथलीट गुरविंदर सिंह की सफलता का जिक्र किया जाना राज्य के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में पुरुषों की 100 मीटर दौड़ का राष्ट्रीय रिकॉर्ड दो दिनों के भीतर तीन बार टूटा, जो भारतीय खेलों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर अनिमेष कुजूर ने 10.15 सेकंड में 100 मीटर दौड़ पूरी कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया और राष्ट्रमंडल खेल 2026 के लिए क्वालीफाई किया। उनकी यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और क्या बताया?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और धावक अनिमेष कुजूर के बीच हुई बातचीत युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने बताया कि अनिमेष की सफलता के पीछे उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच का बड़ा योगदान है। प्रधानमंत्री से संवाद के दौरान अनिमेष ने अपने संघर्ष और सफर को साझा करते हुए बताया कि कोविड-19 महामारी के समय उनकी खेलों में रुचि बढ़ी। मित्रों और आसपास के लोगों के उत्साहवर्धन से उन्होंने एथलेटिक्स को अपनाया। उन्होंने कहा कि रास्ते में कई चुनौतियां और संदेह सामने आए, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा और लगातार आगे बढ़ते रहने का फैसला किया।
समृद्ध विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मि
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि 'मन की बात' कार्यक्रम में बिलासपुर जिले के ऐतिहासिक स्थल मल्हार से प्राप्त प्राचीन ताम्र-पट्टिकाओं का उल्लेख होना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के लिए गौरव का विषय है। उनके अनुसार, इससे राज्य की समृद्ध विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। उन्होंने बताया कि इन ताम्र-पट्टिकाओं की आयु लगभग 1400 से 1500 वर्ष आंकी जा रही है और इन्हें पांडुवंशी काल, खासकर महर्षि बालार्जुन के काल से संबंधित माना जाता है। इन अभिलेखों से उस दौर की प्रशासनिक व्यवस्था, धार्मिक मान्यताओं, सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक जीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में अंकित यह दुर्लभ धरोहर छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास और प्राचीन परंपराओं की समृद्धि को दर्शाने वाला महत्वपूर्ण प्रमाण है।
