IRS Officer Assault Case: दिल्ली की एक अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के दो अधिकारियों को दो दशक पहले एक छापेमारी के दौरान भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के अधिकारी के आवास में जबरन घुसने, मारपीट करने के आरोप में तीन महीने की जेल की सजा सुनाई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट शशांक नंदन भट्ट ने दोषी ठहराए गए सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी वी के पांडे और रामनीश के खिलाफ सजा पर दलीलें सुनीं। रामनीश वर्ष 2000 में छापेमारी के समय पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत थे। रामनीश इस समय सीबीआई में संयुक्त निदेशक हैं।
IRS अधिकारी से मारपीट के मामले में CBI के जॉइंट डायरेक्टर को तीन महीने की सजा, छापेमारी के दौरान लगे थे गंभीर आरोप
अदालत ने दोनों दोषियों पर 50,000-50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल द्वारा दायर शिकायत में दोनों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 427 (शरारत) और 448 (आपराधिक अतिक्रमण) के तहत आरोप लगाए गए थे।
26 साल बाद मिली सजा
जहां लगभग 26 साल बाद मामले में दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को CBI के जॉइंट डायरेक्टर रमनीश गीर और रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) विवेक पांडे को 19 अक्टूबर 2000 को इंडियन रेवेन्यू सर्विस के अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल के घर पर किए गए एक विवादित तलाशी अभियान से जुड़े मामले में, तीन महीने की जेल की सजा सुनाई। यह मामला 19 अक्टूबर, 2000 की एक घटना से संबंधित है, जब सीबीआई की एक टीम ने पश्चिम विहार में अग्रवाल के आवास पर तलाशी और गिरफ्तारी अभियान चलाया था। अग्रवाल ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने तड़के उनके घर में जबरन प्रवेश किया, उनके साथ मारपीट की और गिरफ्तारी के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया।
'निजी रंजिश'
शिकायत के अनुसार, CBI और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बिना किसी कानूनी वजह के, एक IRS अधिकारी के परिसर में जबरदस्ती प्रवेश किया। अग्रवाल, जो उस समय प्रभावशाली हस्तियों से जुड़ी संवेदनशील जांचों को देख रहे थे, उन्होंने दावा किया कि उन्हें भ्रष्टाचार के एक मामले में झूठा फंसाया गया। शिकायत में यह संकेत दिया गया कि यह छापा वैध जांच के आधार पर नहीं, बल्कि निजी रंजिश के चलते मारा गया था और यह आरोप लगाया गया कि अधिकारियों ने उनके चौकीदार के साथ मारपीट की, परिवार के सदस्यों को एक कमरे में बंद कर दिया, और उन्हें जबरदस्ती उनके बेडरूम से बाहर खींचकर निकाला, जिससे उन्हें चोटें आईं। छापे के समय को लेकर भी चिंताएं उठीं, क्योंकि यह घटना एक ट्रिब्यूनल द्वारा उनके तबादले और निलंबन पर रोक लगाए जाने के कुछ ही समय बाद हुई थी।
