मोक्ष धाम की भूमि गया में बिहार का एक सबसे बड़ा डैम है। इस डैम को रबड़ डैम के नाम से जाना जाता है। ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी गया में हर दिन हजारों लोग अपने पित्तरों के मोक्ष के लिए आते हैं। वहीं मोक्षायदनी फल्गु नदी के पावन जल से अपने पित्तरों का तर्पण करते हैं। इसी को लेकर इसे कुछ समय पहले तैयार किया गया था। यहां आए लोगों को किसी तरह की असुविधा न हो इसके लिए यहां रबड़ डैम का इंतजाम कराया गया था।
गया, रबड़ डैम
इसके बन जाने से यहां आए लोगों को काफी सुविधा मिली है। इस डैम की लंबाई 411 मीटर और चौड़ाई 95 मीटर है। इससे पहले यह गंदे पानी और कचरे का ढेर लगा रहता था, जिससे श्रद्धालुओं को तर्पण करने में काफी परेशानी होती थी, लेकिन, जबसे रबर डैम बना है, लोगों की तर्पण के लिए पानी की खत्म हो गई है।
देवघाट पर है सीताकुंड
आपको बता दें कि विष्णुपद देवघाट से पूर्वी तट पर बने सीताकुंड पिंडवेदी जाने की दूरी भी पहले से कम हो गई है। पहले सीताकुंड जाने के लिए बाईपास होकर जाना होता था। कुछ श्रद्धालु तो पैदल नदी पार करते थे। वहीं डैम के ऊपर स्टील के पुल ने लोगों को बड़ी राहत दी है। सीताकुंड और गयाजी रबर डैम को कनेक्ट करने के लिए इसे सीता पथ नाम दिया गया है।
पूरे साल मिलता है स्वच्छ जल
यहां आने वाले तीर्थ यात्रियों को पूरे साल सालभर स्वच्छ जल मिलता है। गया और गयाजी रबर डैम को विकसित करने के लिए और काम किए गए हैं, गया के इस सीताकुंड को गयाजी डैम को जोड़ने वाला सीता पथ को पक्का किया जाएगा, जिससे लोगों को आने जाने में काफी सुविधा होगी।
