रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, दशहरा और दीपावली... त्योहारी सीजन से ठीक पहले आम जनता को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के खुदरा बाजारों में चीनी की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। पिछले एक महीने के भीतर चीनी के दाम लगभग ₹15 से ₹20 प्रति किलो तक बढ़ गए हैं, जबकि बीते एक साल के आंकड़े देखें तो कुल बढ़ोतरी ₹25 से ₹30 प्रति किलो तक दर्ज की गई है। हाल ही में ₹55 प्रति किलो बिकने वाली शक्कर अब भोपाल के बाजारों में ₹70 प्रति किलो के आंकड़े को छू चुकी है।
चीनी के बढ़े दाम पर लोगों ने दी प्रतिक्रिया
ग्राहक जरूरत भर खरीद रहे शक्कर, एथेनॉल को लेकर भी चर्चा
बाजार में किराना दुकानदारों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के कारण ग्राहकों के खरीद व्यवहार में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। जो ग्राहक पहले महीने भर का राशन एक साथ जमा करते हुए 5 से 10 किलो शक्कर ले जाते थे, वे अब केवल 1 से 2 किलो शक्कर ही खरीद रहे हैं। एक किराने के दुकानदार ने बताया कि, सोशल मीडिया और खबरों से ग्राहक जागरूक हैं। लोगों का मानना है कि गन्ने से बड़े पैमाने पर एथेनॉल बनाया जा रहा है, जिससे बाजार में चीनी की आपूर्ति पर असर पड़ा है और दाम बढ़े हैं। एक ग्राहक ने तो तंजिया लहजे में कहा कि "या तो गाड़ी चला लो या चाय पी लो और मिठाई खा लो!"
एक चीज के दाम बढ़ने से पूरे घर का बजट प्रभावित
बाजार में खरीदारी करने आई एक महिला ग्राहक का कहना है कि मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों पर इस महंगाई का सबसे गहरा असर पड़ रहा है। किसी एक जरूरी चीज के दाम बढ़ते हैं तो उसका असर केवल रसोई तक सीमित नहीं रहता। रसोई के बजट के साथ-साथ घर में काम करने वाले सहायक और ड्राइवर भी महंगाई का हवाला देकर अपनी तनख्वाह बढ़ाने की मांग करने लगते हैं। इसके अलावा, प्याज जैसी अन्य दैनिक जरूरतों के दाम भी साथ-साथ बढ़ने से हर महीने का घरेलू बजट पूरी तरह बिगड़ जाता है।
मिठाइयों के दाम 10 से 12% तक बढ़े, आगे और इजाफा संभव
चीनी के दामों में आए इस उछाल का सबसे सीधा असर मिठाई कारोबार पर देखने को मिल रहा है। मिठाई दुकान के संचालकों का कहना है कि हाल के दिनों में नमकीन, पैकेजिंग मटेरियल, कमर्शियल गैस और शक्कर की बढ़ती लागत के कारण मिठाइयों के दामों में 10% से 12% तक का इजाफा हो चुका है। मिठाई निर्माताओं के अनुसार, 1 किलो मिल्क केक जैसी पारंपरिक मिठाइयों में लगभग 200 ग्राम तक शक्कर का इस्तेमाल होता है। यदि शक्कर की कीमतें इसी तरह बनी रहीं या आगे और बढ़ती हैं, तो मिठाइयों के प्रति किलो दाम में ₹5 से ₹10 या उससे अधिक की बढ़ोतरी करना उनकी मजबूरी बन जाएगा।
कमाई स्थिर, लेकिन महंगाई आसमान पर
बाजार में खरीदारी करने आए अन्य नागरिकों का कहना है कि सरकार को इस दिशा में तुरंत कड़े कदम उठाने की जरूरत है। पेट्रोल, बस भाड़े, सब्जियों, दालों और शक्कर के लगातार बढ़ते दामों से आम आदमी की कमर टूट चुकी है। कमाई में बढ़ोतरी नहीं हो रही है, लेकिन दैनिक उपभोग की चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। त्योहारों के इस समय में अगर महंगाई पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो त्योहारों की मिठास कड़वाहट में बदल जाएगी।
