भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में दुग्ध संघों के माध्यम से समान उत्पादों के निर्माण के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करने का निर्देश दिया है। उन्होंने मंगलवार को डेयरी विकास बोर्ड की बैठक में यह बात कही। इसके साथ ही, सभी विश्वविद्यालयों में पशु चिकित्सा पाठ्यक्रमों को संचालित करने और विटनरी काउंसिल ऑफ इंडिया के सहयोग से नए सिलेबस को लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने दुग्ध उत्पादकों को दूध की कीमतों के नियमित और समय पर भुगतान की व्यवस्था की निगरानी करने की भी बात की। उन्होंने नगरीय निकायों की गो-शालाओं के उन्नयन में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड से सहयोग लेने की आवश्यकता बताई। इसके अलावा, सीमित पहुंच वाले क्षेत्रों में निजी दूध विक्रेताओं को तकनीकी प्रशिक्षण देने की बात भी की गई।
सीएम मोहन यादव (फोटो- Mohan Yadav Twitter )
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2030 तक 26,000 गांवों में डेयरी नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा, जिससे 52 लाख किलोग्राम दूध का संकलन होगा। बैठक में यह भी बताया गया कि दुग्ध संघों में डिजिटल प्रक्रिया शुरू की गई है, जैसे इंदौर दुग्ध संघ द्वारा मोबाइल एप का उपयोग। भोपाल दुग्ध संघ ने दूध की गुणवत्ता की जांच के लिए "दूध का दूध-पानी का पानी" अभियान शुरू किया है। उज्जैन दुग्ध संघ ने पशुधन स्वास्थ्य में सुधार के लिए विशेष अनुदान की व्यवस्था की है। अंत में, प्रदेश में निर्मित दुग्ध उत्पादों की राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
