Project Cheetah: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृढ़ संकल्पों की बदौलत अफ्रीका से 3 वर्ष पहले भारत लाए गए चीतों को यहां का मौसम रास आने लगा है। भारत सरकार ने चीतों की पुनर्स्थापना मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में 17 सितंबर, 2022 को की थी इसके लिए उन्होंने चीता पुनर्वास परियोजना (Project Cheetah) की शुरुआत की जिसका मकसद भारत में 1952 में विलुप्त हो चुके चीतों को फिर से बसाना था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो साभार: @byadavbjp)
नामीबिया से भारत लाए गए चीते
साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट से चीते को भारत लाने की इजाजत मिलने के बाद भारत सरकार ने 20 जुलाई 2022 को नामीबिया के साथ एक एमओयू साइन किया जिसके बाद 17 सितंबर 2022 को 8 चीतों को पहला बैच नामीबिया से भारत पहुंचा। इन चीतों को स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने कूनो नेशनल पार्क के बाड़े में छोड़ा था और फिर लगभग 5 माह बाद 18 फरवरी 2023 को 12 चीतों का दूसरा बैच दक्षिण अफ्रीका से कूनो पहुंचा था।
अफ्रीकी चीतों को भारतीय मौसम, वातावरण और जंगल के अनुकूल ढलने में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन अंतत: वह यहां के अनुकूल ढल गए और उनका कुनबा भी बढ़ा। चीतों का कूनो नेशनल पार्क की आबोहवा रास आ गई। लिहाजा उन्हें दूसरे स्थानों पर भी बसाने के बारे में सोचा जाने लगा।
कूनो में गूंजी किलकारियां
तीन वर्षों में अफ्रीका से लाए 20 चीतों ने 26 शावकों को जन्म दिया। कूनो नेशनल पार्क किलकारियों से गूंज उठा। चीतों को लंबे समय तक कूनो नेशनल पार्क के बाड़े में रखने के बाद जंगलों में छोड़ा गया और ऐसे में उन्होंने कई बार जंगल की सीमा लांघी और उत्तर प्रदेश-राजस्थान तक पहुंच गए। हालांकि, इन चीतों को कभी वापस लाना पड़ा तो कभी वह खुद वापस आ गए और उन्होंने शिकार करना भी शुरू कर दिया।
चीतों ने कई बार मुश्किल हालातों का सामना भी किया और आलम यह रहा कि अफ्रीका से लाए गए 20 चीजों में से 11 चीते ही बचे। आंकड़ों की बात करें तो 20 में से 9 चीतों और 26 में से 10 शावकों ने अपने साथी चीतों और शावकों को अलविदा कह दिया। इसके बावजूद चीतों का कुनबा बढ़ा और उनकी संख्या बढ़कर 27 हो गई। भारत में चीतों के जीवित रहने की औसत दर लगभग 61 फीसदी हो गई, जो वैश्विक औसत (40 फीसदी) से कहीं ज्यादा है।
नए चीतों के स्वागत के लिए भारत तैयार
चीतों का तीसरा बैच लाने की तैयारियां हो रही हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस साल दिसबंर के अंत में तीसरा बैच आएगा। अफ्रीकी देश बोत्सवाना और नामीबिया के साथ बातचीत जारी है। ऐस में अगले बैच में 8 से 10 चीतों को भारत लाया जाना है जिन्हें कूनो या फिर गांधीसागर सेंचुरी में छोड़ा जाएगा।
क्या है सरकार की योजना
मोदी सरकार की योजना है कि हर साल 10 से 12 चीतों को उनके अनुकूल परिस्थितियों के आधार पर छोड़ा जाए। ऐसे में चीतों के लिए कुछ नई जगहें तलाशी जा रही हैं। कूनो के अलावा 3 चीते मध्य प्रदेश के गांधीसागर में हैं। फिलहाल मध्य प्रदेश के नौराडीह और गुजरात के बन्नी ग्रासलैंड को भी चीतों के लिए नए अभ्यारण्य के तौर पर तैयार किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में जब सरकार ने चीनों को 17 सितंबर 2022 को भारत लाने का सपना पूरा किया तब ऐसी आशंकाएं जताई जा रही थीं कि क्या अफ्रीकी देश से लाया गया एक भी चीता यहां पर जिंदा रह पाएगा। साथ ही यहां तक कहा गया कि लेपर्ड के साथ चीतों का रहना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि, जब शुरुआत में 20 चीते आए और एक साल के भीतर ही लगभग 6 चीतों की मौत हो गई तो कई तरह के सवाल खड़े होने लगे, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की लगातार निगरानी और मॉनिटरिंग की वजह से न सिर्फ चीतों को कूनो और गांधीसागर का मौसम रास आया, बल्कि उनका परिवार भी बढ़ा।
