मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित एम्स में केवल एलोपैथी का ही इलाज नहीं होगा। अब यहां आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का बड़ा संग्रह भी उपलब्ध होगा। क्योंकि यहां एमपी का सबसे बड़ा हर्बल गार्डन बनाने की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि इस हर्बल गार्डन में अन्य राज्यों से औषधीय पौधे लाये जाएंगे, जिनके माध्यम से विभिन्न प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जाएगा। बता दैं कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य पुराने औषधीय ज्ञान को विज्ञान के साथ जोड़ना है। बताया दें कि यह पहल न्यू एजुकेशन पॉलिसी 2020 के तहत है, जो विभिन्न प्रकार की चिकित्सा पद्धतियों को एकीकृत करने पर जोर देती है।
पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन के साथ मिलकर किया जाएगा तैयार
मिली जानकारी के अनुसार, भोपाल हर्बल गार्डन एम्स और बाबा रामदेव की पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से मिलकर तैयार किया जाएगा। भोपाल एम्स में बनने वाले इस हर्बल गार्डन में मध्य प्रदेश के साथ उत्तराखंड और देश के अन्य राज्यों में मिलने वाले औषधीय पौधों लाकर यहां लगाए जाएंगे। हर्बल गार्डन को लेकर भोपाल एम्स निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि यह गार्डन साधारण गार्डन नहीं होगा, क्योंकि इसमें आदिवासी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान उपयोग किया जाएगा, जो इलाज के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय सदियों से औषधीय पौधों को लेकर विस्तृत और गहरा ज्ञान रखता है, जो लोगों के बेहतर इलाज के लिए के लाभकारी साबित होगा। साथ ही यह सस्ता भी होगा।
हर्बल गार्डन के दो प्रमुख लाभ
एम्स में बनने वाले हर्बल गार्डन के दो प्रमुख लाभ हैं। पहला लाभ अस्पताल में आयुष विभाग के मरीजों को औषधीय जड़ी-बूटियां उपलब्ध होंगी। इसका दूसरा लाभ में मेडिकल छात्रों को इन पौधों पर गहन रिसर्च करने का अवसर मिलेगा। एम्स के निदेशक ने बताया कि हर्बल गार्डन को 5 हिस्सों में बांटा जाएगा, जिसमें छात्रों को पौधों के गुणों को समझने के साथ जांचने का अवसर मिलेगा।
