पंजाब में लगातार गहराते भूजल संकट के बीच ताजा सरकारी आकलन में सुधार के संकेत सामने आए हैं। आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने सोमवार को दावा किया कि राज्य में भूजल दोहन का स्तर पिछले चार वर्षों में 11.58 फीसद अंक कम हुआ है। उनके मुताबिक, नहर के पानी के इस्तेमाल में बढ़ोतरी और नहर नेटवर्क को मजबूत करने से भूजल पर निर्भरता घटाने में मदद मिली है।
कुल 153 डार्क जोन ब्लॉकों में से 95 में सुधार दर्ज किया गया
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बलतेज पन्नू ने बताया कि पंजाब में भूजल दोहन का स्तर 2021-22 में 163.80 प्रतिशत था, जो 2025 में घटकर 156.36 प्रतिशत और 2025-26 में 152.22 प्रतिशत रह गया। इसी अवधि में सालाना भूजल निकासी लगभग 28.01 बिलियन क्यूबिक मीटर से घटकर 26.32 बिलियन क्यूबिक मीटर हो गई।
नहर के पानी के इस्तेमाल में बड़ा इजाफा
पन्नू के अनुसार, राज्य में नहर के पानी के इस्तेमाल का स्तर 2022 में लगभघ 21 फीसद था, जो अब बढ़कर 80 से 82 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने 14100 नहरें चालू कीं, 400 किलोमीटर से ज्यादा बंद नहरों की मरम्मत की और 1000 किलोमीटर से अधिक नहरों को पक्का करने का काम किया है। इसके अलावा भूजल रिचार्ज बढ़ाने के लिए रिचार्ज पॉइंट भी बनाए गए हैं।
उन्होंने दावा किया कि ताजा आकलन में 153 डार्क जोन ब्लॉकों में से 95 में सुधार दर्ज किया गया है। गंभीर श्रेणी वाले ब्लॉकों की संख्या भी 10 से घटकर अब 6 रह गई है। चार ब्लॉक सुरक्षित श्रेणी में पहुंच गए हैं। इनमें फाजिल्का का अरनीवाला, फिरोजपुर का मक्खू, होशियारपुर का हाजीपुर और पठानकोट का नरोट जैमल सिंह शामिल हैं।
ग्राउंड वाटर रिचार्ज भी बढ़ा
पन्नू ने बताया कि पंजाब में कुल सालाना भूजल रिचार्ज 19.14 बिलियन क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया है। इसमें बारिश से 5.53 बिलियन और नहर के पानी से 5.5 बिलियन क्यूबिक मीटर रिचार्ज शामिल है। नहर के पानी से होने वाला रिचार्ज पिछले साल के 4.5 बिलियन क्यूबिक मीटर से बढ़कर 5.5 बिलियन क्यूबिक मीटर हो गया है।
उन्होंने बताया कि कुल 26.32 बिलियन क्यूबिक मीटर भूजल निकासी में लगभग 24.95 बिलियन क्यूबिक मीटर खेती में इस्तेमाल होता है, जबकि घरेलू और औद्योगिक जरूरतों के लिए लगभग 1.38 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी निकाला जाता है।
हालांकि, पन्नू ने माना कि पंजाब अब भी गंभीर भूजल संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि ताजा आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भूजल दोहन की रफ्तार कम करने और नहर के पानी का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में बदलाव शुरू हुआ है। उन्होंने इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए अहम बताते हुए कहा कि राज्य को खेती में ट्यूबवेल पर निर्भरता और कम करने की जरूरत है।
