15 साल पुराने फर्जी दस्तावेज मामले में बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण बरी, कहा- मानसिक आघात पहुंचा

अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि उनका देश की न्याय प्रणाली पर हमेशा से पूरा भरोसा रहा है। हालांकि, इतने सालों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया पर दुख जताते हुए उन्होंने कहा कि इस लंबे मुकदमे ने उन्हें और उनके संस्थान को काफी मानसिक और सामाजिक नुकसान पहुंचाया।

Balkrishna Acquitted: देहरादून स्थित CBI की विशेष अदालत ने योग गुरु बाबा रामदेव के करीबी सहयोगी और पतंजलि योगपीठ के प्रबंध निदेशक एवं महासचिव आचार्य बालकृष्ण को 15 साल पुराने फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट मामले में बरी कर दिया है। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (CBI) की अदालत ने सोमवार (7 सितंबर) को यह फैसला सुनाते हुए बालकृष्ण के साथ-साथ सह-आरोपी नरेश चंद्र द्विवेदी को भी सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। नरेश चंद्र पर बालकृष्ण को कथित रूप से फर्जी दस्तावेज मुहैया कराने का आरोप था।

Balkrishna

बाबा रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण बरी

फैसले के बाद क्या बोले आचार्य बालकृष्ण?

अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि उनका देश की न्याय प्रणाली पर हमेशा से पूरा भरोसा रहा है। हालांकि, इतने सालों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया पर दुख जताते हुए उन्होंने कहा कि इस लंबे मुकदमे ने उन्हें और उनके संस्थान को काफी मानसिक और सामाजिक नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा, "मुझे देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और आज सत्य की जीत हुई है। लेकिन यह लंबी कानूनी प्रक्रिया बेहद थका देने वाली रही। इस दौरान मुझे अकारण ही अपमान, बदनामी और दूसरों की नकारात्मक ऊर्जा को सहन करना पड़ा।"

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