Ayodhya Ram Mandir Inaguration: देश और दुनिया के रामभक्तों की भव्य राम मंदिर बनने बहुप्रतीक्षित इच्छा अगले साल 22 जनवरी को पूरी होने जा रही है। इसी दिन रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी। इस कार्यक्रम को वैश्विक बनाने की तैयारी में कई दिशाओं में काम हो रहा है। चंपत राय की अध्यक्षता में हुई विहिप-संघ परिवार की एक बैठक में कार्यक्रम को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस बैठक में ये भी तय हुआ कि, 22 जनवरी के इस कार्यक्रम में दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया जाएगा।
अयोध्या राम मंदिर। (फोटो क्रेडिट: @ShriRamTeerth/X)
इन लोगों को निमंत्रण
कहा जा रहा है कि, सौहार्दपूर्ण भावना से सभी मजहब, विचारधारा और पंथ प्रमुखों को भी प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में आने के लिए आमंत्रण भेजा जाएगा। ट्रस्ट के लोगों ने बताया है कि, सभी क्षेत्रों के विशिष्टजनों और संत महात्माओं को भी निमंत्रण भेजा जा रहा है। वहीं, चिकित्सा, शिक्षा, व्यवसाय और सामाजिक-धार्मिक सेक्टर से जुड़े सम्मानित लोगों को भी इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाएएगा। वहीं, शहीदों के स्वजन और नागरिक सम्मान से सम्मानित लोगों को भी श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र आमंत्रित करेगा।
गांवों में लगेगी LED
विहिप-संघ परिवार ने कहा है कि, 1 से 15 जनवरी के बीच देश के लगभग सभी गांवों के मंदिरों में धार्मिक आयोजन होंगे। भजन-कीर्तन के साथ-साथ कई जगहों पर धार्मिक अनुष्ठान कराए जाने पर भी विचार हो रहा है। इसके अलावा सभी गांवों में एलईडी के माध्यम से हर गांव में प्राण प्रतिष्ठा समारोह का कार्यक्रम लाइव दिखाया जाएगा।
दर्शन के लिए बना खास प्लान
बताया गया है कि, एलईडी लगाने के पीछे एक खास वजह ये है कि, कार्यक्रम के दिन जरूरत से ज्यादा भीड़ अयोध्या न आए। देश के सभी रामभक्त गांव-घर पर रहकर ही इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बन सके। वहीं, भीड़ को नियंत्रण के लिए अलग-अलग तिथियों पर दर्शन करने की अनुमति दी जाएगी। गौरतलब है कि, काशी क्षेत्र के लोगों के लिए 30 जनवरी की तारीख तय की गई है।
घर बैठेगा मिलेगा प्रसाद
विहिप-संघ परिवार की बैठक में एक फैसला और होने की बात कही जा रही है। दरअसल, रामलला की प्राणप्रतिष्ठा के बाद तकरीबन 10 करोड़ परिवारों (जिन्होंने निधि समर्पण अभियान के जरिएअपना अंशदान दिया है) के घर पर रामलला का प्रसाद भी पहुंचाया जाएगा। ये निर्णय भी इसीलिए लिया गया है कि ताकि प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भक्तों की संख्या नियंत्रित हो सके।
