असम चुनाव 2026: क्षेत्रीय दलों के लिए 'करो या मरो' की स्थिति, क्या भाजपा-कांग्रेस के बीच अपनी जमीन बचा पाएंगे AGP और रायजोर दल?

असम विधानसभा चुनाव 2026 की घोषणा हो चुकी है और इसके साथ ही राज्य की राजनीति में एक बार फिर वही पुराना लेकिन सबसे बुनियादी सवाल गूंज रहा है, 'असमिया अस्मिता' का रक्षक कौन? दशकों से बाहरी घुसपैठियों की चुनौती झेल रहे असम में इस बार क्षेत्रीय दलों का अस्तित्व दांव पर लगा है।

Assam Assembly Election 2026: असम की राजनीति हमेशा से 'क्षेत्रीयता' के इर्द-गिर्द घूमती रही है। अपनी भाषा, संस्कृति और जमीन को 'बाहरी' लोगों (अवैध प्रवासियों) से बचाने की जद्दोजहद यहाँ के मतदाताओं का सबसे बड़ा मुद्दा है। लेकिन इस चुनाव में चर्चा इस बात की है कि क्या असम गण परिषद (AGP) जैसे क्षेत्रीय दल अपनी मूल विचारधारा को छोड़कर राष्ट्रीय पार्टियों के 'जूनियर पार्टनर' बनकर रह गए हैं?

Regionalism in Assam Assembly Election 2026

क्या अपनी पहचान खो रहे हैं क्षेत्रीय दल?

जब राष्ट्रीय दलों ने 'हाईजैक' किया क्षेत्रीय मुद्दा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 'असोमिया जातीयोताबाद' (असमिया राष्ट्रवाद) जो कभी क्षेत्रीय दलों की ताकत था, उसे अब भाजपा और कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टियों ने अपने पाले में कर लिया है। 2016 में भाजपा ने जब 'जाति, माटी, भेटी' (समुदाय, जमीन और घर) का नारा दिया, तो उसने सीधे तौर पर मूल निवासियों की भावनाओं को छुआ। इसको लेकर पीटीआई ने कॉलमनिस्ट ब्रोजेन डेका से बात की। डेका के अनुसार, राष्ट्रीय पार्टियों के पास संसाधन अधिक हैं, इसलिए चुनावी उत्तरजीविता (Survival) के लिए क्षेत्रीय दलों को उनके साथ समझौता करना पड़ रहा है।

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