दिल्ली : आम आदमी पार्टी ने बुधवार को अपनी नई राष्ट्रीय परिषद की बैठक में बड़ा फैसला लिया। देश के अलग-अलग हिस्सों से कुल 330 सदस्यों की बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद के लिए अरविंद केजरीवाल के नाम पर सर्वसम्मति बनी। साथ ही संगठन को और मजबूत करने के साथ-साथ पार्टी की आगामी राजनीतिक रणनीति पर भी चर्चा हुई। पंकज गुप्ता को राष्ट्रीय सचिव चुना गया, जबकि ND गुप्ता कोषाध्यक्ष बने रहेंगे। बैठक में 23 सदस्यों वाली नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन किया गया।
अरविंद केजरीवाल फिर से बनाए गए 'आप' राष्ट्रीय संयोजक
जानकारी के मुताबिक, बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद के लिए अरविंद केजरीवाल के नाम पर सर्वसम्मति से मुहर लगी। इसके साथ ही संगठन की मौजूदा व्यवस्था में भी निरंतरता रखी गई है। पंकज गुप्ता को दोबारा राष्ट्रीय सचिव और एनडी गुप्ता को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पार्टी ने अपने शीर्ष संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करते हुए 23 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन भी किया। यह कार्यकारिणी पार्टी के महत्वपूर्ण फैसलों और संगठन से जुड़े कामकाज को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाएगी। राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों की ओर से अरविंद केजरीवाल को दोबारा राष्ट्रीय संयोजक चुने जाने पर सोशल मीडिया के जरिए बधाई देने का सिलसिला शुरू हो गया।
अनुराग ढांडा ने केजरीवाल को दी बधाई
पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने अनुराग ढांडा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि नई राष्ट्रीय परिषद ने सर्वसम्मति से केजरीवाल को राष्ट्रीय संयोजक चुना है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल के नेतृत्व और मार्गदर्शन में पार्टी आगे की चुनौतियों और संघर्षों के लिए तैयार है। अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी की स्थापना के समय से ही इसके राष्ट्रीय संयोजक हैं। पार्टी का औपचारिक गठन 26 नवंबर 2012 को दिल्ली में हुआ था। भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल कानून की मांग को लेकर चले आंदोलन से जुड़े केजरीवाल और उनके सहयोगियों ने राजनीतिक दल के रूप में AAP की शुरुआत की थी।
कब बनी आम आदमी पार्टी
निर्वाचन आयोग ने 2013 में AAP को राजनीतिक दल के तौर पर मान्यता दी। पूर्व भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी रहे केजरीवाल ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को राजनीतिक मंच में बदलने में अहम भूमिका निभाई। उनका तर्क था कि शासन व्यवस्था में बदलाव और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए चुनावी राजनीति में उतरना जरूरी है।
AAP ने 2013 में पहली बार दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ा। उस चुनाव में केजरीवाल ने नई दिल्ली सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराया था। इसके बाद पार्टी ने दिल्ली में कई बार सरकार बनाई और पंजाब समेत अन्य राज्यों में भी अपना राजनीतिक आधार बढ़ाया। केजरीवाल 2013 से 2024 के बीच तीन अलग-अलग कार्यकाल में दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे।
