Bankipur Assembly Seat Result: बिहार केबांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, इन नतीजों को राज्य स्तर के व्यापक राजनीतिक रुझान के रूप में देखना सही नहीं होगा। उपचुनावों की प्रकृति और इतिहास पर नजर डालें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि इसके नतीजे भविष्य के बड़े चुनावों का संकेत नहीं होते।
बांकीपुर में बीजेपी की रैली (फोटो- bjp4bihar)
उपचुनाव राज्य-स्तर के रुझान नहीं दिखाते
उपचुनाव मुख्य रूप से एक स्थानीय प्रतिनिधि (MLA) चुनने की प्रक्रिया है, न कि राज्य की सरकार तय करने का चुनाव। इसलिए इसके नतीजों को पूरे राज्य के राजनीतिक मिजाज के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
पहले भी हो चुका है ऐसा
उत्तर प्रदेश का उदाहरण (2018)- यूपी के गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा को समाजवादी पार्टी (SP) से हार का सामना करना पड़ा था। यह सीटें खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा खाली की गई थीं। इसके बावजूद, भाजपा ने 2019 के आम चुनाव और 2022 के विधानसभा चुनाव में राज्य में शानदार जीत हासिल की।
महाराष्ट्र का उदाहरण (2023)-कस्बा पेठ उपचुनाव में भाजपा अपनी सबसे मजबूत सीटों में से एक कांग्रेस के रवींद्र धंगेकर से हार गई थी। लेकिन 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा ने न केवल कस्बा पेठ सीट वापस जीती, बल्कि भाजपा नीत NDA ने 232 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया।
ये उदाहरण साबित करते हैं कि उपचुनाव के नतीजे भविष्य के आम या विधानसभा चुनावों के परिणामों को नहीं दर्शाते।
कम मतदान का पड़ता है असर
आम चुनावों या राज्य के मुख्य विधानसभा चुनावों की तुलना में उपचुनावों में मतदाताओं का उत्साह अक्सर कम रहता है। बांकीपुर उपचुनाव में भी केवल 34.24% मतदान दर्ज किया गया। इतने कम वोटिंग प्रतिशत के कारण नतीजों का विश्लेषण करते समय सावधानी बरतनी चाहिए, और इसे सीधे तौर पर भाजपा के वास्तविक वोट बेस में गिरावट से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
EVM की आलोचना कितना सही?
जब भी भाजपा बिहार, दिल्ली या पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चुनाव जीतती है, तो विपक्षी दल अक्सर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर सवाल उठाने लगते हैं। चुनाव परिणामों के आधार पर चुनिंदा तरीके से EVM की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करना लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख को कमजोर करता है। बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि EVM से जुड़े सभी आरोपों का कोई आधार नहीं है।
