ये तो हद है! प्रमोशन के लिए फर्जी मुठभेड़ में आरोपियों के पैर पर मार रहे गोलियां; UP पुलिस के कारनामे पर...

अदालत ने कहा, “समय से पहले प्रोन्नति या वीरता पुरस्कार, पुलिस मुठभेड़ के तुरंत बाद पुलिस टीम के अधिकारी को नहीं दिया जाएगा। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इस तरह के पुरस्कार की सिफारिश तभी की जाए जब पुलिस प्रमुख द्वारा गठित समिति उस व्यक्ति को वीरता पुरस्कार के लिए संदेह से परे पाती है।

प्रयागराज : उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक आरोपी को जमानत दे दी और आरोपियों के घुटने या उससे नीचे गोली मारने की लगातार घटनाओं के लिए पुलिस को फटकार लगाई। अदालत ने यह संकेत भी दिया कि ऐसी मुठभेड़ों को समय से पहले पदोन्नति पाने या सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध होने के लिए रचा गया हो सकता है। राजू उर्फ राजकुमार नाम के एक आरोपी की जमानत याचिका मंजूर करते हुए न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई की कानून की नजर में अनुमति नहीं है क्योंकि आरोपी को सजा देने का काम न्यायपालिका का है। भारत एक लोकतांत्रित देश है जो संविधान से चलता है जिसमें विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की भूमिका स्पष्ट रूप से अलग की गई है।

UP Police Fake Encounters

UP पुलिस को इलाहाबाद कोर्ट ने लगाई फटकार

अदालत ने कहा कि प्रशंसा की आड़ में या अन्य बाहरी उद्देश्यों के लिए पुलिस अधिकारियों को अनावश्यक रूप से गोली चलाकर एक अपराधी को दंडित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि दंड देने का काम न्यायपालिका का है। अदालत के पूर्व के निर्देश के मुताबिक, प्रदेश के अपर गृह सचिव संजय प्रसाद और पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए शुक्रवार को उच्च न्यायालय के समक्ष पेश हुए और पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज बनाम महाराष्ट्र सरकार (2014) के मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी निर्देश के अनुपालन में एक अगस्त, 2017 और 11 अक्टूबर, 2024 को डीजीपी द्वारा जारी सर्कुलर पेश किया।

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