Allahabad High Court Alimony Rule: तलाकशुदा पत्नी के गुजारा भत्ते (Alimony/Maintenance) को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट ने झांसी की एक पारिवारिक अदालत (Family Court) से इस बात पर आधिकारिक स्पष्टीकरण (Explanation) मांगा है कि पत्नी की दूसरी शादी हो जाने की जानकारी रिकॉर्ड पर होने के बावजूद, पूर्व पति को हर महीने गुजारा भत्ता देने का आदेश क्यों जारी किया गया।
दूसरी शादी के बाद पत्नी को गुजारा भत्ता क्यों? इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, झांसी फैमिली कोर्ट के जज से मांगा लिखित स्पष्टीकरण
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने झांसी कुटुम्ब न्यायालय के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश हरीश चंद्र को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
क्या है पूरा मामला? (तलाक के महज 1 महीने बाद शादी)
यह पूरा विवाद एक पूर्व पति द्वारा दायर की गई पुनरीक्षण याचिका (Revision Petition) के बाद सामने आया, जिसमें झांसी की पारिवारिक अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के समक्ष घटनाक्रम का पूरा ब्यौरा पेश किया:
30 जुलाई 2025: झांसी के कुटुम्ब न्यायालय (Family Court) ने कानूनी तौर पर पति-पत्नी के बीच तलाक को मंजूरी दी थी।
अगस्त 2025 (एक महीने बाद): तलाक की डिक्री मिलने के महज एक महीने बाद ही पत्नी ने दूसरी शादी कर ली।
हलफनामे से दी गई थी सूचना: पूर्व पति के वकील के मुताबिक, पत्नी द्वारा दूसरी शादी कर लिए जाने का पुख्ता तथ्य बकायदा एक हलफनामे (Affidavit) के जरिए झांसी की अदालत के संज्ञान में लाया गया था।
कोर्ट के फैसले पर हाईकोर्ट पर आपत्ति
पारिवारिक अदालत के सामने पत्नी की दूसरी शादी का कानूनी प्रमाण होने के बावजूद, अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ने पूर्व पति को आदेश दिया था कि वह अपनी पूर्व पत्नी को ₹10,000 प्रति माह और अपने बेटे को ₹5,000 प्रति माह का गुजारा भत्ता दे।
इसी आदेश के खिलाफ पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी, 'झांसी कुटुम्ब न्यायालय के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश हरीश चंद्र को यह स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया जाता है कि महिला की दूसरी शादी की जानकारी होने के बावजूद पूर्व पति को उसे 10,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश क्यों दिया गया।'
क्या कहता है देश का कानून?
भारतीय कानून (विशेष रूप से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 या वर्तमान नागरिक सुरक्षा संहिता) के तहत भरण-पोषण और गुजारे भत्ते को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ है:
दोबारा शादी पर अधिकार खत्म: कानूनी प्रावधानों के अनुसार, एक तलाकशुदा पत्नी केवल तब तक ही अपने पूर्व पति से गुजारा भत्ता पाने की हकदार होती है, जब तक वह अपनी आजीविका चलाने में असमर्थ हो और उसने दूसरी शादी न की हो।
पति की जिम्मेदारी की समाप्ति: जैसे ही महिला किसी अन्य पुरुष से विवाह कर लेती है, कानूनन उसकी देखभाल और भरण-पोषण की जिम्मेदारी उसके नए पति पर स्थानांतरित हो जाती है। पूर्व पति उसे गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य नहीं रहता। हालांकि, बच्चों के भरण-पोषण (जैसे इस मामले में बेटे के ₹5,000) पर पिता की जिम्मेदारी बनी रहती है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिला को भी इस संबंध में नोटिस जारी किया है। इस हाई-प्रोफाइल कानूनी मामले की अगली सुनवाई अब 21 जुलाई को तय की गई है, जहां झांसी कोर्ट के जज का स्पष्टीकरण रिकॉर्ड पर लिया जाएगा।
