शादीशुदा पुरुष के लिव-इन पर इलाहाबाद HC का अलग-अलग नजरिया, 'तलाक के बिना नहीं' वाले बयान से लिया यू-टर्न

Allahabad HC on man in live-in: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि एक विवाहित पुरुष का आपसी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहना कोई अपराध नहीं है; यह टिप्पणी हाई कोर्ट की ही एक पिछली टिप्पणी के विपरीत है।

Allahabad HC on Live-in relationships: इलाहाबाद हाई कोर्ट की हालिया टिप्पणी कि कोई विवाहित पुरुष, किसी वयस्क के साथ आपसी सहमति से 'लिव-इन' रिश्ते में रहने पर कोई अपराध नहीं कर रहा है, यह बात उसकी(हाई कोर्ट) अपनी ही एक पिछली टिप्पणी के विपरीत है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 25 मार्च को यह टिप्पणी की कि एक शादीशुदा पुरुष का लिव-इन रिलेशनशिप कोई अपराध नहीं है; कोर्ट ने कहा कि सामाजिक नैतिकता, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के कोर्ट के कर्तव्य पर भारी नहीं पड़ सकती।

शादीशुदा पुरुष के लिव-इन पर इलाहाबाद HC का अलग-अलग नजरिया

शादीशुदा पुरुष के लिव-इन पर इलाहाबाद HC का अलग-अलग नजरिया

न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक मामले में दो याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण देते हुए की। अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए कहा, 'यदि एक विवाहित पुरुष किसी वयस्क महिला के साथ उसकी सहमति से सहजीवन संबंध में रह रहा है, तो यह कोई अपराध नहीं है। नैतिकता और कानून को अलग-अलग रखना होगा। यदि कानून के तहत कोई अपराध नहीं बनता, तो सामाजिक विचार और नैतिकता अदालत का मार्गदर्शन नहीं करेंगे।'

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