Agra News : उत्तर प्रदेश के आगरा में बुजुर्ग से जुड़ी दर्दभरी खबर सामने आई है। यहां के सिकंदरा क्षेत्र में रामलाल वृद्धाश्रम है, जहां पर उस वक्त हर किसी की आंख नम हो गई जब बुजुर्ग ने अपना दर्द सुनाया। उन्होंने बताया कि, उनका एक बेटा IAS है और दूसरा बेटा बड़ा कारोबारी है। बुजुर्ग ने रोते हुए बताया कि, घर में उनके साथ बेटे नौकरों जैसा बर्ताव करते थे। अपमानित होते-होते एक दिन उनके सब्र का बांध टूट गया और कठोर मन से उन्हें वृद्धाश्रम आने के लिए विवश होना पड़ा। बल्केश्वर के रहने वाले बुजुर्ग शनिवार को वृद्धाश्रम पहुंचे थे।
आगरा से सामने आई दर्दभरी खबर। (प्रतीकात्मक फोटो)
बेटों के बर्ताव ने तोड़ दिया दिल
बल्केश्वर निवासी 78 वर्षीय बुजुर्ग ने बताया है कि, उन्होंने अपने दोनों बेटों की परवरिश और पढ़ाई-लिखाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसी का परिणाम है कि, आज एक बेटा आईएएस बनकर दूसरे राज्य में तैनात है तो वहीं दूसरा बेटा कारोबारी है। बुजुर्ग ने बताया कि, वे बैंक के रिटायर्ड कर्मचारी हैं और उनके पास करोड़ों की कोठी है। इन छोटा बेटा लाखों की रकम लेने के बाद अब परिवार से अलग होकर कमलानगर में रहता है और बातचीत तक नहीं करता। बड़ा बेटा आईएएस होने के बाद भी कभी बात नहीं करता। एक बेटी है जो भाइयों की तरह ही बर्ताव करती है और पत्नी सारा दिन मोबाइल में व्यस्त रहती है। उन्होंने बताया, परिवार में अकेलापन और लोगों द्वारा अपमानित होने से वे बहुत दुखी हैं। बेटों के बर्ताव ने उनका दिल तोड़ दिया इसलिए वे वृद्धाश्रम रहने के लिए आ गए।
बैंक से ले चुके वीआरएस
रामलाल वृद्धाश्रम के संचालक शिव प्रसाद शर्मा ने बताया कि पीडि़त बुजुर्ग ने आवेदन पत्र दिया था। इसमें उन्होंने बताया था कि वे अपने बेटे और पत्नी के व्यवहार से काफी दु:खी हैं। करोड़ों की कोठी में कोई भी साथ नहीं रहता है और इसके अलावा वहां पर उन्हें रोज अपमानित होना पड़ता है। शिव प्रसाद बताते हैं कि, बुजुर्ग ने सेंट्रल बैंक में प्रबंधक पद से ऐच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लिया था। हालांकि जब उनके परिवार को उनके वृद्धाश्रम आने की बात पता चली तो वे लोग रविवार को आए और समझौता कर उन्हें ले गए।
रामलाल वृद्धाश्रम में हैं तीन सौ से ज्यादा बुजुर्ग
रामलाल वृद्धाश्रम के संचालक शिव प्रसाद शर्मा के मुताबिक, वृद्धाश्रम में कुल तीन सौ से भी ज्यादा बुजुर्ग माता-पिता रहते हैं। यहां पर अपने स्वजन से आहत और दु:खी बुजुर्ग माता-पिता रहते हैं। आश्रम में कुल 150 बुजुर्ग महिलाएं और 180 बुजुर्ग पुरुष रहते हैं, जो कि अपने स्वजन द्वारा सताए हुए हैं।
