Agra Weather Update: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में कोहरा छाया रहा। इसके साथ ही धुंध की चादर भी दिखाई दी। बर्फीली हवाएं और कंपा देने वाली सर्दी ने हाल बेहाल कर दिया। सोमवार को मौसम के मिजाज से हड्डियां तक कांप गईं। आगरा में सुबह घर से निकलने वालों की हालत खराब हो गई। कोल्ड डे कंडीशन में होने से हार्ट और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। मंगलवार को भी कड़ाके की सर्दी में सूरज बादल की ओट में छिपा रहा। कड़ाके की ठंड से लोग ठिठुरते रहे। यूपी में पारे का ग्राफ लगातार नीचे गिरता जा रहा है। कोहरे ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। कोहरे के साथ धुंध से दृश्यता बहुत कम हो गई। सड़कों पर वाहन रेंगते हुए दिखाई दिए। इसके साथ ही रेल सेवा भी कोहरे से प्रभावित हुई।
आगरा में कोहरे ने थामी रफ्तार
सोमवार को कोहरे ने लगातार सातवें दिन भी रेल गाड़ियों की चाल बिगाड़ दी। अप और डाउन की दो दर्जन से ज्यादा ट्रेन छह से सात घंटों की देरी से स्टेशन आईं। इस दौरान हजारों यात्री सर्द हवाओं के बीच ट्रेनों का इंतजार करते दिखाई दिए। पटना-कोटा एक्सप्रेस साढ़े पांच घंटे देरी से यहां पहुंची।
ये ट्रेनें कोहरे के कारण हुईं लेट
बेंगलुरू से नई दिल्ली कर्नाटक एक्सप्रेस 4 घंटे 30 मिनट की देरी से पहुंची। मानिकपुर जंक्शन-निजामुद्दीन एक्सप्रेस 4 घंटे 30 मिनट लेट रही। निजामुद्दीन-विशाखापट्टनम समता एक्सप्रेस 3 घंटे 30 मिनट देरी से आई। जबलपुर-निजामुद्दीन सुपरफास्ट एक्सप्रेस सवा चार घंटा देरी से आगरा कैंट स्टेशन पर पहुंचीं। इनके अलावा हैदराबाद-नई दिल्ली तेलंगाना एक्सप्रेस 3 घंटे, भुसावल जंक्शन-निजामुद्दीन गोंडवाना एक्सप्रेस 3 घंटे, बेंगलुरू-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस 2 घंटे, उत्तर प्रदेश संपर्क क्रांति एक्सप्रेस 2 घंटे देरी से पहुंची। चेन्नई-नई दिल्ली जीटी एक्सप्रेस 2 घंटे, निजामुद्दीन-हैदराबाद दक्षिण एक्सप्रेस ढाई घंटे, मालवा एक्सप्रेस तीन घंटे, मुंबई-अमृत्तसर सुपरफास्ट एक्सप्रेस 3 घंटे और छिंदवाड़ा-फिरोजपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस ढाई घंटा देरी से आगरा आईं।
कनेक्टिंग ट्रेन वाले यात्रियों को हुई खासी परेशानी
उधर, ट्रेनों की लेटलतीफी से सैकड़ों ऐसे यात्री ज्यादा परेशान हुए जिन्हें एक ट्रेन से उतरकर घर या काम पर जाने के लिए दूसरी ट्रेन से सफर करना था। आगरा कैंट और आगरा फोर्ट पर ऐसे यात्रियों की पहली ट्रेन के घंटों लेट होने के कारण दूसरी ट्रेन छूट गई। इससे उन्हें मानसिक परेशानी के साथ-साथ आर्थिक नुकसान हुआ। दूसरी ट्रेन में कंफर्म टिकट के बाद भी यात्रियों को बस व दूसरे साधनों से अपने गंतव्य के लिए रवाना होना पड़ा।
