Agra : 24 साल से अधिग्रहण प्रक्रिया में फंसी जमीन, हाईकोर्ट पहुंचा किसान, SC के फैसले का दिया हवाला

उत्तर प्रदेश के आगरा में 24 साल पूर्व 'अरतौनी योजना' के लिए अधिग्रहित की गई जमीन पर न तो कब्जा लिया गया है और न ही किसान को मुआवजा दिया गया। अब किसान ने हाईकोर्ट का रुख किया है।

आगरा : अपनी पुश्तैनी कृषि भूमि को 24 साल से अधिग्रहण की प्रक्रिया में फंसा रखने के आरोप लगाते हुए किसान राजेंद्र सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की 'अरतौनी योजना' को चुनौती देते हुए कहा है कि सरकार और परिषद ने न तो जमीन का कब्जा लिया और न ही अब तक कोई मुआवजा दिया। याचिका के अनुसार, गांव जौपुरा, तहसील आगरा स्थित करीब 0.4070 हेक्टेयर कृषि भूमि राजेंद्र सिंह के परिवार की पुश्तैनी संपत्ति है और परिवार की आजीविका का मुख्य साधन भी। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2002 में धारा 28 और वर्ष 2012 में धारा 32 की अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन इसके बाद भी अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

Court

(सांकेतिक फोटो-Istock)

किसान ने क्या कहा?

राजेंद्र सिंह ने कोर्ट में कहा कि 24 वर्षों से उनकी जमीन “अनिश्चितता और कानूनी अधर” में फंसी हुई है। न तो सरकार ने कोई अवॉर्ड पारित किया और न ही मुआवजा तय किया गया। इसके बावजूद किसान अपनी जमीन का स्वतंत्र उपयोग भी नहीं कर पा रहे हैं। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित भूमि पहले से ही 1985 में घोषित आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) के विकास क्षेत्र में आती थी। ऐसे में आवास विकास परिषद बिना राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के इस योजना को लागू नहीं कर सकती थी। किसान की ओर से कहा गया है कि यह पूरी कार्रवाई अधिकार क्षेत्र से बाहर और कानून के विपरीत है।

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