Chaitar Vasava: गुजरात की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी (AAP) के डेडियापाड़ा विधायक चैतर वसावा को राजपीपला की सत्र अदालत ने वन विभाग के कर्मचारियों पर हमले, धमकी और कथित उगाही के मामले में दोषी ठहराते हुए 7 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने वसावा की पत्नी शकुंतला वसावा सहित सभी 9 आरोपियों को भी समान सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी पर ₹25,000 का जुर्माना भी लगाया गया है। यह मामला वर्ष 2023 में सामने आया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वन विभाग की जमीन से कथित अतिक्रमण और अवैध खेती हटाने की कार्रवाई के बाद डेडियापाड़ा क्षेत्र में विवाद उत्पन्न हुआ था। आरोप है कि विधायक चैतर वसावा ने वन विभाग के कर्मचारियों को अपने घर बुलाकर उनके साथ मारपीट की, धमकाया और हवाई फायरिंग कर भय का माहौल बनाया।
चैतर वसावा (फाइल फोटो)
वनकर्मियों से ₹60,000 की उगाही
सरकारी वकील वंदना भट्ट के अनुसार, घटना के अगले दिन विधायक के सहयोगियों द्वारा वनकर्मियों से ₹60,000 की कथित उगाही की गई थी। जांच के दौरान ऑनलाइन ट्रांजेक्शन सहित कई साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए, जिन्हें अभियोजन पक्ष ने अपने दावे के समर्थन में रखा। मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में चल रही थी। अदालत ने सरकारी गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर विधायक चैतर वसावा, उनकी पत्नी तथा अन्य सात आरोपियों को दोषी माना।
न्यायिक हिरासत में भेजे गए सभी दोषी
अदालत के फैसले के बाद सभी दोषियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरोपियों को अन्य जिले की जेल में स्थानांतरित करने के लिए भी आवेदन किया गया है। बताया जा रहा है कि दोषियों में एक गर्भवती महिला और एक नवजात शिशु की मां भी शामिल है, जिसके संबंध में अदालत में अलग से आवेदन दिया गया है। यह फैसला गुजरात की राजनीति, विशेषकर नर्मदा और भरूच क्षेत्र की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चैतर वसावा आदिवासी क्षेत्र के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं और आम आदमी पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे हैं।
हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी
अब बचाव पक्ष द्वारा गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी की जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सजा के खिलाफ अपील और सजा पर स्थगन की मांग जल्द की जा सकती है। हालांकि, अदालत के इस फैसले ने करीब दो वर्ष पुराने बहुचर्चित मामले को एक महत्वपूर्ण मुकाम पर पहुंचा दिया है और इसके राजनीतिक असर पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
