उत्तर प्रदेश में लगातार एक्सप्रेसवे और हाईवे की संख्या में इजाफा हो रहा है। राज्य के सभी हिस्सों तक पहुंच आसान बनाने की कवायत जारी है। हालांकि, राज्य में पहले से कई एक्सप्रेसवे संचालित हैं और कईयों का निर्माण कार्य जारी है, जिनमें गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे, गोरखपुर-सिलीगुड़ी और पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे प्रस्तावित हैं। अब यूपी सरकार ने विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किए गए अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) में एक्सप्रेसवे के ढांचे को और मजबूत बनाने के लिए वित्तीय प्रावधान किए हैं। इसमें गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार समेत अन्य चार परियोजनाओं के लिए कुल 18400 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।
यूपी में एक्सप्रेसवे विस्तार परियोजना के लिए बजट
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए बिहार के किशनगंज में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। करीब 519 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को विकसित करने के लिए 32 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में 84.3 किमी, बिहार में 416 किमी और पश्चिम बंगाल में 18.97 किमी यानी कुल लंबाई 519.58 किमी है। अभी गोरखपुर-सिलीगुड़ी को जोड़ने वाली कोई सीधी सड़क नहीं है। लिहाजा, अभी यात्रा का समय 15 घंटे लगता है। लेकिन, इस सड़क मार्ग के बनने से 6 घंटे सफर कम हो जाएगा। इस एक्सप्रेसवे के जरिए बिहार के दरभंगा, चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, किशनगंज, सुपौल, फारबिसगंज को कनेक्ट करेगा। इससे यूपी के गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर से होकर गुजरने पर यहां के यातायात में सुधार होने की संभावना प्रबल है।
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'गंगा एक्सप्रेस-वे विस्तारित प्लान
गंगा एक्सप्रेसवे को मेरठ से हरिद्वार तक विस्तार दिया जाएगा। इस विस्तार के लिए 5,780 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके तहत मेरठ से आगे मुजफ्फरनगर और रुड़की होते हुए हरिद्वार (उत्तराखंड) तक संपर्क मार्ग बनाया जाएगा, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल के यात्रियों को सुविधा होगी।
'गंगा एक्सप्रेस वे' की मौजूदा स्थिति
'गंगा एक्सप्रेस वे' की लंबाई 594 किलोमीटर है। मेरठ से प्रयागराज तक बन रहा यह एक्सप्रेस-वे सूबे के 12 जिलों के कुल 518 गांव से होकर गुजरेगा। छह लेन में तैयार हो रहे इस एक्सप्रेस-वे को आगे जरूरत पड़ने पर बढ़ाकर आठ लेन का किया जा सकता है। इस पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कार चलाई जा सकता है और मेरठ से प्रयागराज की दूरी मात्र छह घंटे में पूरी की जा सकती है पहले चरण का काम पूरा होने के बाद 'गंगा एक्सप्रेसवे' प्रदेश के 12 जिलों मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से होकर गुजरेगा।
विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे
विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे 2,380 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह 117 किलोमीटर लंबा लिंक एक्सप्रेसवे सोनभद्र और चंदौली को गाजीपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। विंध्य ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे के निर्माण से पूर्वांचल के जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ और झारखंड तक सफर आसान होगा। विस्तार के बाद 6 लेन 320 किलोमीटर लंबा विंध्य एक्सप्रेसवे प्रयागराज से शुरू होकर मिर्जापुर, वाराणसी, चंदौली से होते हुए सोनभद्र तक निर्मित किया जाएगा। इसके निर्माण में सरकार 22400 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जिसमें किसानों की जमीन का अधिग्रहण शामिल है।
फर्रुखाबाद ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे के लिए बजट
फर्रुखाबाद ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए 400 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जो फर्रुखाबाद और हरदोई को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा।
इटावा-हरदोई-फर्रुखाबाद ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे इटावा के कुदरैल गांव में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे से बुंदेलखंड़ एक्सप्रेसवे (Bundelkhand Expressway) को जोड़ने वाले चैनेज से गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए नया एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है। यह 92 किलोमीटर लंबा नया एक्सप्रेसवे हरदोई जिले की सवायजपुर तहसील के कौसिया गांव में गंगा एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होगा। यह नवनिर्मित एक्सप्रेसवे इटावा से हरदोई को वाया फर्रुखाबाद जोड़ेगा। फिलहाल, इस लिंक एक्सप्रेसवे को निर्माण करने के लिए शासन की ओर से स्वीकृति मिलने के बाद यूपीडा (UPEIDA) ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
जेवर एयरपोर्ट-गंगा एक्सप्रेसवे लिंक
जेवर एयरपोर्ट-गंगा एक्सप्रेसवे लिंक नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) को सीधे गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए 250 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है, जिससे बुलंदशहर और पश्चिमी यूपी के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।
चिल्ला रेगुलेटर एलिवेटेड फ्लाईओवर दिल्ली (मयूर विहार) के चिल्ला रेगुलेटर से नोएडा के महामाया फ्लाईओवर तक बनने वाले इस एलिवेटेड फ्लाईओवर के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा, एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ औद्योगिक गलियारों के विकास के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
