Dharamshala News: हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के खनियारा क्षेत्र में मोबाइल पर गेम खेलने को लेकर एक दर्दनाक घटना सामने आई है। मोबाइल फोन न मिलने से नाराज एक 14 साल के बच्चे ने कथित तौर पर घर के कमरे में फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मृतक की पहचान प्रिंस के रूप में हुई है। मृतक के पिता रवि कुमार ने बताया कि प्रिंस लगातार अपनी मां से मोबाइल फोन मांग रहा था, ताकि वह गेम खेल सके। मां ने उसे मोबाइल नहीं दिया, इसके बाद प्रिंस नाराज होकर अपने कमरे में चला गया। परिवार ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि नाराजगी में वह इतना बड़ा कदम उठा लेगा।
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में दर्दनाक घटना (प्रतीकात्मक फोटो)
पिता ने अन्य अभिभावकों से की अपील
रवि ने बताया कि जब उनकी बेटी घर पहुंची और खाना लेने के लिए रसोई की ओर गई तो उसने अपने भाई प्रिंस को फंदे पर लटका देखा। परिजनों ने तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्रिंस के पिता रवि कुमार ने घटना के बाद अन्य अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि उनका बेटा तो चला गया, लेकिन किसी और का बच्चा ऐसी घटना का शिकार न हो इस नाते उन्होंने माता-पिता से बच्चों को मोबाइल फोन और गेमिंग की लत से दूर रखने का आग्रह किया। उन्होंने स्कूलों से भी अपील की कि बच्चों को पढ़ाई और होमवर्क के नाम पर लगातार मोबाइल पर निर्भर न बनाया जाए। उनका कहना है कि बच्चों को मोबाइल से दूर रखकर उन्हें खेलकूद और अन्य गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
बच्चों में मोबाइल फोन का चलन तेजी से बढ़ रहा
उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने कहा कि आजकल छोटे बच्चों में मोबाइल फोन का चलन तेजी से बढ़ रहा है और बच्चे सोशल मीडिया सहित विभिन्न ऑनलाइन गतिविधियों का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई देशों में बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल को लेकर प्रतिबंध और नियंत्रण की व्यवस्था की गई है। उन्होंने आगे कहा कि पहले बच्चों के खेलने के लिए घरों के आसपास मैदान और खुले स्थान होते थे माता-पिता बच्चों को बाहर खेलने के लिए भेजते थे, जिससे वे शारीरिक रूप से स्वस्थ भी रहते थे। लेकिन बदलते समय के साथ ये गतिविधियां कम होती जा रही हैं और बच्चों ने मनोरंजन तथा खेल का साधन मोबाइल फोन को बना लिया है। डीसी ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए समाज को सबसे पहले अपनी सोच और प्रवृत्ति में बदलाव लाना होगा और प्रशासन भी जागरूकता के लिए समाज के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। उन्होंने बताया कि बच्चों को मोबाइल की बढ़ती निर्भरता से बचाने के लिए अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के सभी वर्गों को मिलकर जागरूकता फैलानी होगी।
