Hospital Bill तो पास हो गया, लेकिन डिस्चार्ज के बाद रिकवरी का खर्च कौन उठाएगा?

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी दवाओं, फिजियोथेरेपी और फॉलो-अप टेस्ट का खर्च जेब पर भारी पड़ सकता है। जानें कैसे पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन कवर, क्रिटिकल इलनेस राइडर और इमरजेंसी फंड के जरिए आप रिकवरी के दौरान वित्तीय रूप से सुरक्षित रह सकते हैं।

स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) लेते समय अधिकांश लोग केवल इस बात पर ध्यान देते हैं कि अस्पताल में भर्ती होने (Hospitalization) पर कमरे का किराया, डॉक्टर की फीस और सर्जरी का खर्च कवर हो जाए। क्लेम पास होने और अस्पताल से छुट्टी मिलने पर मरीज और उनका परिवार राहत की सांस लेता है। लेकिन अक्सर असली वित्तीय चुनौती अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद शुरू होती है। गंभीर बीमारियों या बड़ी सर्जरी के बाद पूर्ण रूप से ठीक होने में हफ्तों या महीनों का समय लग जाता है। इस रिकवरी अवधि के दौरान होने वाले भारी-भरकम खर्चे अक्सर मरीज की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल देते हैं।

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Hospital Bill तो पास हो गया, लेकिन डिस्चार्ज के बाद रिकवरी का खर्च कौन उठाएगा?

रिकवरी के समय का पैसा कौन भरेगा?

अस्पताल से घर आने के बाद मरीज को नियमित डॉक्टर कंसल्टेशन, महंगी दवाएं, फिजियोथेरेपी, मेडिकल डायग्नोस्टिक टेस्ट और कई बार होम हेल्थकेयर या मेडिकल अटेंडेंट की आवश्यकता होती है। अगर मरीज परिवार का मुख्य कमाने वाला सदस्य है, तो रिकवरी के दौरान काम पर न जा पाने के कारण आय का नुकसान (Loss of Income) भी होता है। साधारण हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी केवल अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान के खर्चों को प्राथमिकता देती है। ज्यादातर पॉलिसियों में 'पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन' कवर होता है, जो डिस्चार्ज के 60 से 90 दिनों तक का खर्च देता है, लेकिन यदि रिकवरी का समय इससे अधिक हो जाए तो सारा खर्च खुद उठाना पड़ता है।

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