PM Surya Ghar Yojana : भारत में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए विश्व बैंक ने एक बड़ा कदम उठाया है। विश्व बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने भारत की राष्ट्रीय रूफटॉप सोलर (Rooftop Solar) योजना के लिए 890 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 7,400 करोड़ रुपये) के वित्तीय पैकेज को मंजूरी दी है। इस मदद का उद्देश्य देश के करोड़ों परिवारों तक सस्ती और स्वच्छ बिजली पहुंचाना, रोजगार के नए अवसर पैदा करना और निजी निवेश को बढ़ावा देना है। इस योजना से शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों के लोगों को भी फायदा मिलेगा।
रूफटॉप सोलर योजना पर भारत को विश्व बैंक का बड़ा आर्थिक सहयोग
कहां से आएगा यह पैसा?
विश्व बैंक की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस वित्तीय पैकेज में 820 मिलियन डॉलर का ऋण इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (IBRD) देगा। इसके अलावा क्लीन टेक्नोलॉजी फंड (CTF) की ओर से 60 मिलियन डॉलर का रियायती ऋण और IBRD के लिवेबल प्लैनेट फंड से 10 मिलियन डॉलर का अनुदान (ग्रांट) दिया जाएगा। इस तरह कुल 890 मिलियन डॉलर की सहायता भारत के रूफटॉप सोलर मिशन को मजबूत बनाने में इस्तेमाल होगी।
4.2 अरब डॉलर का निजी निवेश भी जुटाया जाएगा
विश्व बैंक केवल वित्तीय सहायता ही नहीं देगा, बल्कि करीब 4.2 अरब डॉलर का निजी निवेश भी जुटाने में मदद करेगा। यह राशि वाणिज्यिक बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी ताकि आम परिवार आसानी से अपने घरों की छत पर सोलर पैनल लगवा सकें। इससे लोगों को सोलर सिस्टम लगाने के लिए पैसे जुटाने में आसानी होगी और बिजली पर होने वाला खर्च भी कम होगा।
PM सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना को मिलेगा बल
यह पूरा वित्तीय सहयोग केंद्र सरकार की PM सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना को आगे बढ़ाने के लिए दिया जा रहा है। इस योजना का लक्ष्य देश के 1 करोड़ ग्रामीण और शहरी परिवारों की छतों पर सोलर पैनल लगवाना है। सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक लोग अपने घरों में सौर ऊर्जा अपनाएं ताकि बिजली के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम हो और स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़े।
बिजली बिल होगा कम, पर्यावरण को भी मिलेगा फायदा
रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के बाद परिवार अपनी जरूरत की बिजली खुद तैयार कर सकेंगे। इससे हर महीने आने वाला बिजली बिल काफी कम हो जाएगा। साथ ही कोयला और अन्य जीवाश्म ईंधन से बनने वाली बिजली पर निर्भरता घटेगी, जिससे प्रदूषण कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा देश में सोलर उपकरणों के निर्माण को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे 'मेक इन इंडिया' अभियान को मजबूती मिलेगी।
17 लाख से अधिक रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद
विश्व बैंक का अनुमान है कि इस कार्यक्रम के जरिए करीब 17 लाख (1.7 मिलियन) नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। ये नौकरियां सोलर पैनल निर्माण, उपकरणों की सप्लाई, इंस्टॉलेशन, रखरखाव और अन्य सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में मिलेंगी। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और देश का स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ेगा।
अब तक क्यों पीछे था रूफटॉप सोलर?
विश्व बैंक के अनुसार, भारत ने बड़े स्तर पर सोलर पार्क और बड़े सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में काफी प्रगति की है, लेकिन घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाने की रफ्तार अपेक्षा के अनुसार नहीं बढ़ सकी। इसकी सबसे बड़ी वजह शुरुआती लागत, आसान वित्तीय सुविधा की कमी और लोगों में जागरूकता का अभाव रहा है। PM सूर्य घर योजना इन सभी चुनौतियों को दूर करने का प्रयास कर रही है।
बिना गारंटी के मिलेगा वित्तीय सहयोग
विश्व बैंक के अधिकारियों का कहना है कि इस कार्यक्रम के तहत लोगों को बिना किसी संपत्ति की गारंटी (Collateral-Free Financing) के वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। साथ ही बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम), बैंकों और सोलर उपकरण विक्रेताओं की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी, ताकि लोगों को एक ही जगह पर पूरी सुविधा मिल सके और सोलर सिस्टम लगवाने की प्रक्रिया आसान हो जाए।
भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को मिलेगी रफ्तार
भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही सरकार का उद्देश्य 2035 तक देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत तक पहुंचाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि विश्व बैंक की यह नई वित्तीय सहायता और PM सूर्य घर योजना मिलकर भारत को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगी। इससे करोड़ों परिवारों को सस्ती बिजली, देश को स्वच्छ ऊर्जा और लाखों युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
