PF में 1,800 रुपये ही कटने से क्या बढ़ जाएगी आपकी इन-हैंड सैलरी? जानिए क्या कहता है नया नियम

नए EPF नियम के तहत पीएफ में 1800 रुपये से अधिक के योगदान को स्वैच्छिक माना जाएगा। सरकार ने साफ किया है कि ईपीएफ में 15000 रुपये की सैलरी पर 12% के हिसाब से 1800 रुपये ही पीएफ बनते है।

केंद्र सरकार ने 'सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020' के तहत 'एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) स्कीम, 2026' को नोटिफाई किया है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता (employer) दोनों के लिए ₹1,800 का फिक्स्ड मंथली EPF योगदान तय किया गया है। इस रकम से ज्यादा कोई भी योगदान दोनों पक्षों की मर्जी पर निर्भर करेगा। यानी उसे स्वैच्छिक भविष्य निधि (Voluntary Provident Fund) माना जाएगा।

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1800 रुपये पीएफ योगदान

यह नया सिस्टम पहले के सैलरी-बेस्ड योगदान स्ट्रक्चर की जगह लेगा, जिसमें आम तौर पर दोनों पक्षों को कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का 12% योगदान करना होता था और अनिवार्य योगदान पर कोई फिक्स्ड मॉनेटरी लिमिट नहीं होती थी। जानकारों का कहना है कि नए नियम से कंपनियों को कॉस्ट-कटिंग और सैलरी कस्टमाइजेशन करने में मदद मिलेगी। वहीं, अगर पीएफ 1800 रुपये कटेगा तो कर्मचारी की टेक होम सैलरी बढ़ जाएगी। यानी कर्मचारी के पास ज्यादा कैश होगा।

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