LTCG on Share Market Profit : शेयर बाजार में कमाई करने वाले निवेशकों को क्या जल्द टैक्स से राहत मिल सकती है? Long-Term Capital Gains (LTCG) Tax को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की हालिया टिप्पणी के बाद यह सवाल फिर चर्चा में है। निवेशकों को उम्मीद है कि अगले बजट में शेयर बाजार से होने वाले मुनाफे पर टैक्स का बोझ कम हो सकता है।
लॉन्गटर्म कैपिटल गेन टैक्स पर राहत की उम्मीद
दरअसल, वित्त मंत्री ने 13 अक्टूबर को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026 में कहा कि आगामी बजट की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में अभी यह बताना उचित नहीं होगा कि सरकार किन प्रस्तावों पर विचार करेगी और किन पर नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और विदेश के निवेशक अलग-अलग एसेट क्लास पर टैक्स को लेकर चर्चा कर रहे हैं और सरकार उनके विचार सुनने के लिए तैयार है।
SBI Research ने की LTCG खत्म करने की मांग?
LTCG Tax को लेकर बहस उस समय तेज हुई है, जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से बड़ी रकम निकाल रहे हैं। SBI Research ने अपनी रिपोर्ट में इक्विटी निवेश पर LTCG Tax खत्म करने की सिफारिश की है। उसका मानना है कि इस कदम से विदेशी निवेश को आकर्षित करने और बाजार में पूंजी के अचानक बाहर निकलने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
SBI Research ने क्या कहा?
SBI Research ने इक्विटी में निवेश की अवधि को 2 से 3 साल तक बढ़ाने और LTCG Tax खत्म करने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में रिपोर्ट प्रकाशित होने तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में करीब ₹44,166 करोड़ की बिकवाली कर चुके थे। साल 2026 में इक्विटी बाजार से उनकी कुल निकासी ₹3.04 लाख करोड़ तक पहुंच गई थी।
अभी कितना टैक्स लगता है?
फिलहाल लिस्टेड इक्विटी शेयर और पात्र इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड से एक वित्त वर्ष में होने वाले ₹1.25 लाख से अधिक के पात्र लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5% टैक्स लगता है। इसके लिए संबंधित निवेश पर लागू सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की शर्तों को पूरा करना जरूरी है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी निवेशक को एक वित्त वर्ष में शेयर बेचने से ₹2 लाख का पात्र लॉन्ग टर्म मुनाफा होता है, तो ₹1.25 लाख की सालाना छूट घटाने के बाद ₹75,000 टैक्स के दायरे में आएंगे। इस पर 12.5% की दर से ₹9,375 टैक्स बनेगा। इसमें लागू सेस और सरचार्ज शामिल नहीं हैं।
बजट 2024 में सरकार ने LTCG Tax की दर 10% से बढ़ाकर 12.5% कर दी थी। हालांकि, सालाना टैक्स-छूट की सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹1.25 लाख कर दी गई थी। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर लागू दर भी कुछ पात्र इक्विटी निवेशों के लिए 15% से बढ़ाकर 20% की गई थी।
क्या अगले बजट में मिल सकती है राहत?
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार LTCG Tax की दर घटाएगी, सालाना छूट बढ़ाएगी या टैक्स को पूरी तरह समाप्त करने पर विचार करेगी। फिलहाल इनमें से किसी भी विकल्प पर आधिकारिक सहमति सामने नहीं आई है। टैक्स में राहत के पक्ष में तर्क है कि इससे निवेशकों का टैक्स के बाद मिलने वाला मुनाफा बढ़ सकता है और भारतीय शेयर बाजार विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बन सकता है। दूसरी तरफ, LTCG Tax खत्म करने से सरकारी राजस्व पर असर पड़ सकता है। सरकार को निवेश को प्रोत्साहन देने और राजस्व की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना होगा।
