ईरान और अमेरिका में फिर युद्ध शुरू हो गया है। इसका असर सोमवार से शेयर बाजार की चाल से लेकर कच्चे तेल की कीमत और रुपये के भाव पर पड़ना तय है। मार्केट एक्सपर्ट का मनना है कि एक बार फिर से भारतीय मार्केट पर चौतरफा दबाब देखने को मिल सकता है। इसके अलावा शेयर बाजार की चाल अगले सप्ताह कंपनियों के तिमाही नतीजों, कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई के आंकड़ों से भी तय होगी। मानसून की प्रगति और विदेशी निवेशकों (FPI) की कारोबारी गतिविधियों पर भी निवेशकों की करीबी नजर रहेगी।
शेयर बाजार
महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी निवेशकों की नजर
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा कि घरेलू स्तर पर निवेशक जून के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) और थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़ों के साथ-साथ विदेशी मुद्रा भंडार के ताजा आंकड़ों पर ध्यान देंगे। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों का सीजन अब रफ्तार पकड़ेगा। इस दौरान कंपनियों के प्रबंधन की टिप्पणियां विभिन्न क्षेत्रों की संभावनाओं और आमदनी के अनुमानों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
अमेरिका-ईरान और कच्चे तेल का होगा व्यापक असर
मिश्रा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाले असर पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी।
चार महीनों तक लगातार बिकवाली के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) जुलाई में भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदार बन गए हैं। उन्होंने इस महीने अबतक 15,157 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर खरीदे हैं। इसके पीछे घरेलू आर्थिक संकेतकों में सुधार, रुपये की स्थिरता और वैश्विक जोखिम धारणा में सुधार को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा कि इस सप्ताह एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, यूनियन बैंक और फेडरल बैंक समेत कई कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले हैं। उनके अनुसार, व्यापक आर्थिक मोर्चे पर मुद्रास्फीति के आंकड़े बाजार के लिए अहम संकेतक होंगे।
मानसून की प्रगति पर भी निवेशकों की नजर रहेगी
उन्होंने कहा कि भारत का सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति का आंकड़ा सोमवार को और डब्ल्यूपीआई आधारित मुद्रास्फीति का आंकड़ा मंगलवार को जारी होगा। इसके अलावा ग्रामीण मांग और महंगाई पर प्रभाव को देखते हुए मानसून की प्रगति पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। मीणा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान की स्थिति और उससे कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाला असर बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। वहीं अमेरिका में मंगलवार को सीपीआई और बुधवार को उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) के आंकड़े जारी होंगे, जिनसे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है।
