EPF जमा करने में देरी पर क्या नहीं लगेगा 'ऑटोमैटिक' जुर्माना, बदलेगा पेनल्टी का नियम?

EPF Penalty: देरी से EPF भुगतान पर सेक्शन 14B के तहत ऑटोमैटिक पेनल्टी को चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि अधिकारियों के पास पेनल्टी में छूट देने का अधिकार होना चाहिए।

EPF Penalty : कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 (EPF & MP Act) के सेक्शन 14B के तहत पीएफ डिपॉजिट में देरी होने पर ली जाने वाली पेनल्टी यानी हर्जाना ऑटोमैटिक (स्वचालित रूप से अनिवार्य) है या इसमें अधिकारियों के पास छूट देने का अधिकार है? इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर बहस छिड़ गई है। सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बैंच ने इस मामले को अब एक बड़ी बैंच को भेजने का फैसला किया है।

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EPF केस में नया मोड़! देरी से पीएफ भरने पर ऑटोमैटिक हर्जाना अनिवार्य या नहीं? सुप्रीम कोर्ट में दोबारा जंग शुरू

मामले की पृष्ठभूमि और सुप्रीम कोर्ट का नया कदम

न्यायमूर्ति जे बी पारडीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की बैंच ने 9 सितंबर को दिए गए अपने 14 पन्नों के आदेश में साल 2022 के अपने ही एक पुराने फैसले पर संदेह जताया है। वर्ष 2022 में 'हॉर्टिकल्चर एक्सपेरिमेंट स्टेशन गोनिकॉपल' मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पीएफ भुगतान में देरी होने पर सेक्शन 14B के तहत पेनल्टी स्वचालित रूप से अनिवार्य (Mandatory) हो जाती है। हालांकि यह पूरा विवाद 'मेसर्स केरल इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन बनाम सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज' से जुड़ी याचिकाओं के दौरान सामने आया। यह मामला मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित था कि कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया के तहत सफल समाधान आवेदकों (SRAs) की कर्मचारियों के बकाया पीएफ और ग्रेच्युटी के भुगतान के प्रति क्या जिम्मेदारी होगी।

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