क्या सच में होम लोन बैलेंस ट्रांसफर से कैसे कम होगी आपकी EMI?

अगर आप महंगे होम लोन की EMI से परेशान हैं, तो 'बैलेंस ट्रांसफर' आपके लाखों रुपये बचा सकता है। जानिए कैसे दूसरे बैंक में लोन शिफ्ट करने से ब्याज दरें और EMI दोनों कम हो जाती हैं?

अपना खुद का घर खरीदना हर इंसान का एक बड़ा सपना होता है। लेकिन आज के समय में प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों की वजह से ज्यादातर लोग होम लोन (Home Loan) का सहारा लेते हैं। होम लोन आमतौर पर 15, 20 या 30 साल जैसे लंबे समय के लिए होता है। इतनी लंबी अवधि में बैंक की ब्याज दरों में कई बार उतार-चढ़ाव आता है। कई बार ऐसा होता है कि जिस बैंक से आपने लोन लिया है, वह आपको ऊंची ब्याज दर (High Interest Rate) चार्ज कर रहा होता है, जबकि बाजार में दूसरे बैंक काफी कम ब्याज पर लोन ऑफर कर रहे होते हैं। ऐसी स्थिति में समझदारी इसी में है कि आप अपने लोन को किसी दूसरे बैंक में शिफ्ट कर लें। बैंकिंग टर्म में इसे होम लोन बैलेंस ट्रांसफर (Home Loan Balance Transfer) कहा जाता है। लेकिन क्या सच में इससे आपकी ईएमआई (EMI) कम होती है और लाखों की बचत होती है? आइए जानते हैं

Home Loan

कैसे काम करता है होम लोन बैलेंस ट्रांसफर

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि होम लोन बैलेंस ट्रांसफर काम कैसे करता है। मान लीजिए आपने 'बैंक A' से 9% की ब्याज दर पर होम लोन लिया हुआ है। कुछ साल बाद आपको पता चलता है कि 'बैंक B' नए ग्राहकों को वही लोन 8.25% या 8.5% की दर पर दे रहा है। ऐसे में आप 'बैंक B' के पास जाकर बैलेंस ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकते हैं। अगर 'बैंक B' आपके आवेदन को स्वीकार कर लेता है, तो वह आपके पुराने 'बैंक A' को आपकी बची हुई पूरी लोन राशि (Outstanding Principal) चुका देता है और आपका लोन अकाउंट वहां बंद हो जाता है। अब आपका लोन 'बैंक B' के पास आ जाता है और आप नए बैंक की कम ब्याज दर के हिसाब से अपनी ईएमआई चुकाते हैं। ब्याज दर कम होने का सीधा असर आपकी हर महीने जाने वाली ईएमआई पर पड़ता है, जिससे वह काफी कम हो जाती है।

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