आज के समय में LinkedIn जैसे प्रोफेशनल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ज्यादातर लोग अपनी पढ़ाई, नौकरी और काम का अनुभव साझा करते हैं। लेकिन क्या किसी व्यक्ति का LinkedIn प्रोफाइल यह साबित कर सकता है कि वह कमाई भी कर रहा है? बेंगलुरु की एक अदालत ने इस मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि किसी महिला की शैक्षणिक योग्यता, सोशल मीडिया प्रोफाइल या नौकरी करने की क्षमता को उसकी वास्तविक कमाई का सबूत नहीं माना जा सकता। सिर्फ इस आधार पर उसे गुजारा भत्ता यानी मेंटेनेंस देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या आपका LinkedIn अकाउंट आपके इनकम का आधार माना जा सकता है?
पति ने LinkedIn और Facebook प्रोफाइल को बनाया आधार
दरअसल, एक वैवाहिक विवाद में पति ने अदालत में दलील दी कि उसकी पत्नी पढ़ी-लिखी है और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो सकती है। पति के मुताबिक, पत्नी इंजीनियरिंग ग्रेजुएट है और उसने अमेरिका के न्यू जर्सी में SAP यानी सिस्टम्स, एप्लीकेशंस एंड प्रोडक्ट्स इन डेटा प्रोसेसिंग का कोर्स भी किया है। उसने पत्नी की तस्वीरें, LinkedIn और Facebook प्रोफाइल भी अदालत में पेश कीं। पति का दावा था कि उसकी पत्नी एक प्राइवेट कंपनी में काम कर रही है और इसलिए उसे गुजारा भत्ता देने की जरूरत नहीं है। हालांकि, वह पत्नी की नौकरी, कंपनी या वास्तविक कमाई से जुड़े ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर पाया।
कोर्ट ने क्यों नहीं मानी पति की दलील?
अदालत ने पाया कि पत्नी ने साल 2021 में घरेलू हिंसा से जुड़ी याचिका दाखिल करते समय खुद को बेरोजगार बताया था। पति की ओर से दिए गए संपत्ति और देनदारी के दस्तावेजों में भी पत्नी की नौकरी, आय या ऐसी किसी संपत्ति का जिक्र नहीं था जिससे उसे नियमित कमाई होती हो। कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2026 को सुनाए फैसले में कहा कि केवल तस्वीरों और सोशल मीडिया प्रोफाइल के आधार पर किसी की नौकरी या आय साबित नहीं की जा सकती। कोर्ट ने यह भी माना कि अगर पत्नी ने 2023 के बाद नौकरी शुरू भी की हो, तो इससे यह साबित नहीं होता कि उसकी कमाई खुद और बच्चे का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त है।
क्या कमाने वाली पत्नी को भी मिल सकता है गुजारा भत्ता?
कानूनी जानकारों के मुताबिक, गुजारा भत्ता तय करते समय सिर्फ यह नहीं देखा जाता कि पत्नी नौकरी कर सकती है या नहीं। यह भी देखा जाता है कि उसकी वास्तविक कमाई उसकी जरूरतों और शादी के दौरान मिले जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है या नहीं। अगर पत्नी की आय पर्याप्त है, तो अदालत गुजारा भत्ता देने से इनकार कर सकती है या इसकी रकम कम कर सकती है। वहीं, नाबालिग बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी को भी ध्यान में रखा जाता है।
इन दस्तावेजों से साबित होती है वास्तविक कमाई
किसी व्यक्ति की आय साबित करने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR), फॉर्म-16, सैलरी स्लिप, नौकरी का एग्रीमेंट, बैंक स्टेटमेंट और कारोबार से जुड़े दस्तावेज अहम हो सकते हैं। यानी सिर्फ LinkedIn पर नौकरी का जिक्र या प्रोफाइल में अच्छी डिग्री होना पर्याप्त नहीं है। अदालत हर मामले में दोनों पक्षों की आर्थिक स्थिति, जरूरतों और उपलब्ध सबूतों को देखकर फैसला करती है।
