चांदी की 'चंचलता' इतिहास गवाह है, जब भी चढ़ी है... ऐसे ही गिरी है!

चांदी की चंचलता को समझने के लिए आपको इतिहास में जाना होगा क्योंकि जिसे तेजी से चांदी की कीमतें सातवें आसमान पर चढ़ रही हैं उससे कहा जा सकता है कि चांदी चंचल हो रही है और फिर से इतिहास दोहराने के मूड में है। आइए आपको चांदी की तेजी का इतिहास बताते हैं। उससे पहले ये जान लेते हैं कि मौजूदा समय में इतनी महंगी क्यों हो रही है चांदी?

सर्राफा बाजार में पिछले कुछ दिनों से जारी चांदी की तूफानी तेजी पर शुक्रवार को अचानक ऐसा ब्रेक लगा कि निवेशकों के होश उड़ गए। जो चांदी 29 जनवरी तक रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छू रही थी और ₹4,20,000 के पार निकल गई थी, 30 जनवरी की सुबह उसी बाजार में 'ब्लैक फ्राइडे' जैसा मंजर दिखा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) से लेकर खुदरा बाजार तक, चांदी की कीमतों में 30% की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। 29 जनवरी को जो चांदी अपने शिखर पर थी, वह 30 जनवरी को ₹2,91,911 के निचले स्तर तक गिर गई। यानी एक ही दिन में चांदी करीब ₹1,28,000 प्रति किलो तक सस्ती हो गई। बाजार के इस उतार-चढ़ाव ने एक बार फिर लोगों एक मन में सवाल पैदा कर दिया है कि आखिर चांदी इतनी चंचल क्यों है?

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चांदी की चंचलता को समझने के लिए आपको इतिहास में जाना होगा क्योंकि जिसे तेजी से चांदी की कीमतें सातवें आसमान पर चढ़ रही हैं उससे कहा जा सकता है कि चांदी चंचल हो रही है और फिर से इतिहास दोहराने के मूड में है। आइए आपको चांदी की तेजी का इतिहास बताते हैं। उससे पहले ये जान लेते हैं कि मौजूदा समय में इतनी महंगी क्यों हो रही है चांदी?

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