Why Market is Falling Today: भारतीय शेयर बाजार हाल के दिनों में बेचने दबाव का सामना कर रहा है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कमजोर नतीजे, धीमी आर्थिक वृद्धि और घरेलू मुद्रा का डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर तक गिरना बड़ी वजह हैं। पिछले पांच दिनों में बाजार इडेंक्स, सेंसेक्स (Sensex) में 2,500 से अधिक अंकों की गिरावट आई है, जबकि Nifty 50 भी 23,000 के नीचे चला गया है। आज बीएसई सेंसेक्स 1,227 अंक या 1.59% की गिरावट के साथ 76,084 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 50 दोपहर 2:30 बजे 23,000 अंक से नीचे गिर गया। सभी प्रमुख सेक्टरों में गिरावट आई। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में क्रमशः 3.9% और 3.5% की गिरावट आई।
देशी निवेशकों ने ₹2.75 लाख करोड़ की बिकवाली की, जिससे बाजार में दबाव बढ़ा है।
आज के टॉप बढ़त और गिरावट वाले शेयर कौन से हैं?
एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक में सबसे ज्यादा गिरावट आई, जिनमें 3% तक की गिरावट आई और सेंसेक्स की कुल गिरावट में इनका योगदान 270 अंकों का रहा। सेंसेक्स के टॉप 30 शेयर में सभी स्टॉक में गिरावट दर्ज की गई। किसी में बढ़त नहीं दिखी।
निवेशकों को ₹18 लाख करोड़ का नुकसान
मंगलवार, 11 फरवरी को Sensex ने 77,384.98 पर खुला और फिर 1,281 अंकों की गिरावट के साथ 76,030.59 तक लुढ़क गया। वहीं Nifty 50 भी 1.7% गिरकर 22,986.65 पर आ गया। इस दौरान BSE के मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 3% से ज्यादा की गिरावट देखी गई। BSE में लिस्टेड कंपनियों का टोटल मार्केट कैप ₹426 लाख करोड़ से घटकर ₹408 लाख करोड़ हो गया है। जिसकी वजह से पिछले पांच दिनों में निवेशकों को ₹18 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है।
भारतीय शेयर बाजार गिरावट के पीछे ये हैं 5 मुख्य कारण
1. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारी बिकवाली
विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर 2023 से भारतीय शेयरों की लगातार बिकवाली की है। बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर के कारण इन निवेशकों का भारतीय बाजार से ₹2.75 लाख करोड़ से अधिक का पूंजी बहिर्वाह हो चुका है। इस बीच, 10 फरवरी तक FPI ने ₹12,643 करोड़ के शेयर बेचे हैं।
कमजोर तिमाही परिणाम: कंपनियों के Q3 परिणाम अपेक्षाओं से कमजोर रहे, जिससे बाजार में अनिश्चितता आई।
2. कमजोर तिमाही परिणाम
मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स, को-फाउंडर प्रमोद गब्बी के मुताबिक भारत की कंपनियों के तीसरी तिमाही (Q3) के परिणाम उम्मीदों के अनुसार अच्छे नहीं रहे, और यह चिंता का कारण बना है कि कई कंपनियों के शेयर अपने मौलिक मूल्यों से ऊपर जा रहे हैं। कंज्यूमर स्टेपल्स, ऑटो और बिल्डिंग मटेरियल में सबसे बड़ी निराशा देखने को मिली।
3. रुपये की कमजोरी
डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने विदेशी पूंजी के बहिर्वाह और बाजार की कमजोर भावना को बढ़ावा दिया है। रुपया इस साल अब तक डॉलर के मुकाबले 3% गिर चुका है। सोमवार को रुपया 88 के पास आ गया था, लेकिन मंगलवार को इसमें सुधार हुआ और रुपये ने 61 पैसे की बढ़त हासिल की।
4. हाई वैल्यूएशन पर चिंता
हालांकि हाल ही में गिरावट आई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार अब भी महंगा है। गब्बी के अनुसार, "मूल्यांकन ऊंचे हैं और आय में सुधार आने की संभावना नहीं है।"
5. ट्रेड वार का डर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा व्यापार भागीदारों पर लगाए गए नए शुल्कों ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने का खतरा बढ़ा दिया है। इससे वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर दबाव बढ़ सकता है और मुद्रास्फीति में इजाफा हो सकता है।
क्या करें निवेशक: सुरक्षित विकल्प
विशेषज्ञों का कहना है कि FII की बिकवाली के कारण बड़े शेयरों के मूल्यांकन उचित हो गए हैं, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों के मूल्यांकन अब भी अधिक हैं। Geojit Financial Services के वी. के. विजयकुमार ने सुझाव दिया कि धैर्यवान निवेशक गुणवत्ता वाले बड़े शेयरों में अवसर पा सकते हैं। उन्हें विशेष रूप से बैंकिंग, आईटी, ऑटो, फार्मा, और कैपिटल गुड्स सेक्टर पर फोकस करना चाहिए।
डिस्क्लेमर : यहां शेयर बाजार में निवेश की सलाह नहीं दी गई है। इक्विटी मार्केट में जोखिम होता है, इसलिए निवेश अपने जोखिम पर करें। निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की राय जरूर लें।
