सैलरी से ज्यादा क्यों होती है क्रेडिट कार्ड की लिमिट?

क्रेडिट कार्ड बनवाते समय अक्सर लोगों को उनकी मासिक सैलरी से 2 से 3 गुना ज्यादा लिमिट दी जाती है। जानिए बैंक ऐसा क्यों करते हैं, इसके क्या फायदे-नुकसान हैं और सिबिल स्कोर बचाने के लिए कितना खर्च करना सुरक्षित है।

जब भी कोई व्यक्ति क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करता है या बैंक उसे प्री-अप्रूव्ड (Pre-approved) क्रेडिट कार्ड ऑफर करते हैं, तो अक्सर कार्ड की लिमिट उसकी महीने की इनहैंड सैलरी से काफी अधिक रखी जाती है। उदाहरण के लिए, यदि आपकी मासिक सैलरी 50,000 रुपये है, तो बैंक आपको 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक की क्रेडिट लिमिट दे सकते हैं। कई बार लोग इसे देखकर भ्रमित हो जाते हैं कि बैंक ऐसा क्यों करते हैं और क्या इतनी ज्यादा लिमिट का इस्तेमाल करना उनके लिए सुरक्षित है।

Credit Card Limit

सैलरी से ज्यादा क्यों होती है क्रेडिट कार्ड की लिमिट?

सैलरी से ज्यादा क्यों होती है लिमिट?

बैंकों द्वारा सैलरी से ज्यादा क्रेडिट लिमिट देने के पीछे सबसे मुख्य वजह आपका क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score), रीपेमेंट हिस्ट्री और फाइनेंशियल प्रोफ़ाइल होती है। जब आप अपने पुराने लोन, क्रेडिट कार्ड के बिल या यूटिलिटी बिलों का भुगतान समय पर करते हैं, तो बैंकों की नजर में आपकी क्रेडिट योग्यता (Creditworthiness) बढ़ जाती है। इसके अलावा, बैंक केवल आपकी मौजूदा महीने की सैलरी नहीं देखते, बल्कि आपकी जॉब प्रोफाइल, कंपनी की स्थिरता, अन्य स्रोतों से होने वाली आय और आपके बैंकिंग ट्रैक रिकॉर्ड का भी मूल्यांकन करते हैं।

End of Feed