कौन तय करता है कच्चे तेल की कीमत? किसके इशारों पर नाचता है Crude Oil Rate

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध ने वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों को लेकर तनाव बढ़ा दिया है। आखिर कच्चे तेल की कीमतें कौन तय करता है आइए जानते है?

दुनिया भर की अर्थव्यवस्था की धड़कन माने जाने वाले 'कच्चे तेल' (Crude Oil) की कीमतों में जब भी उतार-चढ़ाव आता है, तो इसका सीधा असर हमारी जेब पर पड़ता है। चाहे वह पेट्रोल-डीजल के दाम हों या रसोई गैस की कीमतें, सब कुछ कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय दर पर निर्भर करता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस कच्चे तेल की कीमत आखिरकार तय कौन करता है? क्या इसके पीछे कोई एक देश है या कोई गुप्त संस्था? सच्चाई यह है कि कच्चे तेल की कीमतें किसी एक व्यक्ति या देश के हाथ में नहीं, बल्कि कई वैश्विक ताकतों और बाजार के जटिल नियमों के तालमेल से तय होती हैं।

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OPEC और OPEC+ की बड़ी भूमिका

कच्चे तेल के खेल में सबसे बड़ा खिलाड़ी 'ओपेक' (OPEC - Organization of the Petroleum Exporting Countries) है। यह सऊदी अरब, यूएई और ईरान जैसे तेल उत्पादक देशों का एक समूह है। इनके पास दुनिया के तेल भंडार का एक बड़ा हिस्सा है। जब ये देश मिलकर तय करते हैं कि तेल का उत्पादन कम करना है, तो बाजार में सप्लाई घट जाती है और कीमतें बढ़ जाती हैं। इसके अलावा रूस जैसे गैर-ओपेक देशों के साथ मिलकर बना 'OPEC+' समूह भी उत्पादन पर लगाम लगाकर या उसे बढ़ाकर वैश्विक कीमतों को नियंत्रित करने में मुख्य भूमिका निभाता है।

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