निजी क्षेत्र या संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) में जमा होता है। यह फंड कर्मचारियों के रिटायरमेंट के बाद का सहारा बनने के साथ-साथ किसी अनहोनी की स्थिति में उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान करता है। ईपीएफओ लगातार अपने सभी अंशधारकों से खाते में ई-नॉमिनेशन (e-Nomination) पूरा करने की अपील करता रहता है, ताकि खाताधारक की असामयिक मृत्यु की स्थिति में जमा राशि आसानी से उसके परिजनों को हस्तांतरित की जा सके। हालांकि, अब भी कई ऐसे पीएफ खाताधारक हैं जिन्होंने अपने खाते में किसी नॉमिनी (nominee) का नाम दर्ज नहीं कराया है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अगर किसी सदस्य की बिना नॉमिनेशन दर्ज किए मृत्यु हो जाती है, तो उनके पीएफ का पैसा किसे और किस प्रक्रिया के तहत मिलेगा।
नॉमिनी का नाम नहीं होने पर किसे मिलेगा EPFO का पैसा?
नॉमिनी नहीं दर्ज तो किसे मिलेगा पैसा?
ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक, अगर किसी पीएफ खाताधारक की मृत्यु के समय कोई नॉमिनी दर्ज नहीं है, तो खाते में जमा पूरी राशि का पहला अधिकार उसके 'कानूनी वारिसों' (Legal Heirs) या परिवार के सदस्यों का होता है। ईपीएफ अधिनियम के तहत परिवार की एक स्पष्ट परिभाषा तय की गई है, जिसमें पुरुष सदस्य की स्थिति में उसकी पत्नी, बच्चे, आश्रित माता-पिता और मृतक बेटे की विधवा व बच्चे शामिल होते हैं। वहीं, महिला सदस्य की स्थिति में उसके पति, बच्चे, आश्रित माता-पिता और मृतक बेटे के वारिस शामिल माने जाते हैं। अगर कोई नॉमिनी नहीं है, तो जमा राशि को परिवार के सभी पात्र और जीवित सदस्यों के बीच बराबर-बराबर बांट दिया जाता है।
कैसे मिलेगा पैसा?
नॉमिनी न होने की स्थिति में पीएफ क्लेम करने की प्रक्रिया थोड़ी लंबी और औपचारिकताओं से भरी हो जाती है। मृतक के परिजनों को क्लेम फॉर्म भरते समय कई कानूनी दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं। इनमें मुख्य रूप से राजस्व अधिकारी द्वारा जारी 'सक्सेशन सर्टिफिकेट' (Succession Certificate) या 'लीगल हेयर सर्टिफिकेट' (Legal Heir Certificate) की आवश्यकता होती है। यह प्रमाण पत्र साबित करता है कि आवेदन करने वाले व्यक्ति ही मृतक के असली और कानूनी उत्तराधिकारी हैं। इसके अलावा, अगर परिवार के अन्य सदस्य किसी एक व्यक्ति के पक्ष में क्लेम की राशि छोड़ना चाहते हैं, तो उन्हें नोटरी से हस्ताक्षरित शपथ पत्र (Disclaimer) और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी जमा करना होता है।
हालांकि कानून के तहत कानूनी वारिसों को पैसा मिल जाता है, लेकिन नॉमिनी न होने पर क्लेम प्रोसेस होने में काफी समय लग सकता है और कागजी कार्रवाई के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इतना ही नहीं, एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) स्कीम के तहत मिलने वाले 7 लाख रुपये तक के मुफ्त जीवन बीमा कवर का दावा करने में भी परिजनों को देरी का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए, वित्तीय विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सभी पीएफ खाताधारकों को ईपीएफओ के आधिकारिक यूएएन (UAN) पोर्टल पर जाकर समय रहते ऑनलाइन ई-नॉमिनेशन की प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में उनके परिवार को बिना किसी झंझट के आर्थिक मदद मिल सके।
