Worlds First Billionaire के तौर पर अक्सर ज्यादातर लोगों के दिमाग में बिल गेट्स और वॉरेन बफे जैसे शख्सों के नाम सामने आते हैं। लेकिन, आधुनिक दुनिया का पहला अरबपति तब बन गया था, जब भारत में अंग्रेजों का राज हुआ करता था। हम जिस शख्स की बात कर रहे हैं, उसका नाम जॉन डी रॉकफेलर (John D. Rockefeller) था।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय बनाने को दान की जमीन
रॉकफेलर का जन्म 8 जुलाई, 1839 को अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य में हुआ था। पिता घूम-घूमकर सामान बेचते थे, आम बोलचाल की भाषा में कहें, तो वे एक फेरी वाले थे। सीमित आय के चलते बचपन से ही रॉकफेलर ने पैसों का हिसाब रखना और बचत करना सिखा। यही वजह रही कि हाई स्कूल भी पूरा नहीं कर पाए और परिवार की आर्थिक तंगी से तंग आकर खुद नौकरी करने लगे। उन्होंने
मामूली बुककीपर के तौर पर हुई शुरुआत
16 साल की उम्र में उन्होंने नौकरी की तलाश शुरू की। कई दिनों तक दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद उन्हें क्लीवलैंड की एक कंपनी में Assistant Bookkeeper की नौकरी मिली। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत के तीन महीने तक उन्हें कोई वेतन नहीं मिला। इसके बाद कंपनी ने उन्हें तीन महीने का बकाया मिलाकर 50 डॉलर दिए। बाद में उनकी तनख्वाह 25 डॉलर प्रति माह तय हुई। उस समय की डॉलर-रुपया विनिमय दर के आधार पर उनकी शुरुआती कमाई करीब ₹1.5–₹1.7 प्रतिदिन बैठती है। यानी एक तरह से रॉकफेलर ने 1.5 रुपये रोज के हिसाब से काम की शुरुआत की थी।
तेल में देखा भविष्य, बदल दी पूरी इंडस्ट्री
रॉकफेलर ने जल्दी ही समझ लिया कि भविष्य तेल का है। उस समय अमेरिका में तेल की खोज शुरू ही हुई थी और कारोबारी इस नए उद्योग में अवसर तलाश रहे थे।साल 1870 में उन्होंने Standard Oil Company की स्थापना की। उन्होंने तेल निकालने से ज्यादा ध्यान उसे रिफाइन करने, सस्ते परिवहन और बड़े पैमाने पर वितरण पर दिया। यही उनकी सबसे बड़ी कारोबारी ताकत बनी। उन्होंने रेलवे कंपनियों से कम मालभाड़े के समझौते किए, नई तकनीक अपनाई और छोटे-छोटे कारोबारों का अधिग्रहण करते गए। कुछ ही वर्षों में Standard Oil अमेरिकी तेल रिफाइनिंग उद्योग की सबसे बड़ी कंपनी बन गई।
एक समय 90% तेल कारोबार पर था कब्जा
इतिहासकारों के अनुसार, जब रॉकफेलर अपने चरम पर थे, तो Standard Oil अमेरिका के करीब 90% तेल रिफाइनिंग कारोबार को नियंत्रित करती थी। इतनी बड़ी हिस्सेदारी ने रॉकफेलर को अपार संपत्ति दिलाई। उनका कारोबार केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनिया के कई देशों में तेल उत्पादों की आपूर्ति होने लगी।
रुतबा देख घबरा गई सरकार
Standard Oil का बढ़ता दबदबा अमेरिकी सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया। कंपनी पर एकाधिकार (Monopoly) कायम करने के आरोप लगे। 1911 में अमेरिकी Supreme Court ने Standard Oil को 34 अलग-अलग कंपनियों में बांटने का आदेश दिया। आम तौर पर माना जाता है कि इससे रॉकफेलर को नुकसान होना चाहिए था, लेकिन हुआ ठीक उल्टा। अलग-अलग कंपनियों के शेयर तेजी से बढ़े और रॉकफेलर इन कंपनियों में बड़े हिस्सेदार बने रहे। उनकी कुल संपत्ति पहले से भी ज्यादा हो गई।
कब बने दुनिया के पहले अरबपति?
इतिहासकारों और कई प्रतिष्ठित संस्थानों के अनुसार, 1916 में जॉन डी. रॉकफेलर की कुल संपत्ति पहली बार 1 अरब डॉलर के पार पहुंच गई। इसी वजह से उन्हें दुनिया का पहला आधिकारिक डॉलर अरबपति माना जाता है। उस समय भारत में अंग्रेजों का शासन था। प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था और दुनिया आर्थिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रही थी। ऐसे समय में किसी एक व्यक्ति के पास 1 अरब डॉलर की निजी संपत्ति होना असाधारण उपलब्धि थी।
आज के पैसों में कितनी होती उनकी संपत्ति?
महंगाई और अर्थव्यवस्था के आकार के हिसाब से अलग-अलग संस्थानों के अनुमान अलग हैं। कुछ आकलनों के अनुसार उनकी संपत्ति आज 300 से 450 अरब डॉलर के बराबर बैठती है, जबकि Guinness World Records अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी के आधार पर इसे 600 अरब डॉलर से अधिक के बराबर मानता है। यानी कई आकलनों में रॉकफेलर की संपत्ति इतिहास के अधिकांश आधुनिक अरबपतियों से भी बड़ी मानी जाती है।
क्या Elon Musk से भी ज्यादा अमीर थे?
इसका सीधा जवाब देना आसान नहीं है। लेकिन, आज की नेटवर्थ देखी जाए तो Elon Musk कई बार 1 ट्रिलियन डॉलर के आसपास पहुंच चुके हैं। लेकिन अगर अलग-अलग समय की अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी और महंगाई को ध्यान में रखकर तुलना की जाए, तो रॉकफेलर इतिहास के सबसे धनी व्यक्तियों में शामिल हैं।
यही वजह है कि अर्थशास्त्री और इतिहासकार उन्हें आधुनिक दौर के सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों में गिनते हैं।
दौलत कमाई ही नहीं, बांटी भी
रॉकफेलर केवल पैसे कमाने के लिए नहीं जाने जाते। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और वैज्ञानिक अनुसंधान पर अरबों डॉलर के बराबर धन दान किया। उन्होंने Rockefeller Foundation की स्थापना की, जो आज भी दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित परोपकारी संस्थाओं में शामिल है। University of Chicago और कई मेडिकल संस्थानों के विकास में भी उनका बड़ा योगदान माना जाता है।
रॉकफेलर परिवार का प्रभाव सिर्फ तेल कारोबार तक सीमित नहीं रहा। Rockefeller Foundation ने वैश्विक स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक शोध को दशकों तक वित्तीय सहायता दी। रॉकफेलर परिवार ने संयुक्त राष्ट्र के शुरुआती दौर में भी अहम योगदान दिया। IMF और World Bank जैसे संस्थानों के पीछे भी अहम भूमिका रही। यहां तक कि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय जिस जमीन पर बना है, उसे रॉकफेलर परिवार ने ही दान किया है।
