ईरान के कच्चे तेल में क्या है खास? वो खजाना जिसके लिए ट्रंप आर-पार की जंग लड़ने को तैयार हैं!

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिख रहा है और इसकी जड़ में है ईरान का कच्चा तेल। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल ईरान के पास ऐसा ऊर्जा खजाना है, जिस पर कई शक्तिशाली देशों की नजर रहती है। कहा जा रहा है कि इसी रणनीतिक और आर्थिक महत्व के कारण अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इसे लेकर सख्त रुख अपनाने को तैयार हैं। आखिर ईरान के तेल में ऐसा क्या खास है, जो इसे वैश्विक राजनीति और संभावित टकराव का केंद्र बना देता है?

दुनिया के नक्शे पर जब भी कच्चे तेल (Crude Oil) की बात होती है, तो अक्सर हमें लगता है कि सारा तेल एक जैसा ही होता होगा। लेकिन असलियत इससे कोसों दूर है। जिस तरह सोने की शुद्धता अलग-अलग होती है, वैसे ही दुनिया के अलग-अलग देशों से निकलने वाले कच्चे तेल की गुणवत्ता, उसका गाढ़ापन (Density) और उसमें मौजूद सल्फर की मात्रा में जमीन-आसमान का फर्क होता है। यही वह तकनीकी पेच है जिसके कारण ईरान का कच्चा तेल पूरी दुनिया, और खासकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आंखों का तारा और कांटा दोनों बना रहा। आइए समझते हैं कि ईरान के इस 'खजाने' में ऐसा क्या खास है।

iran crude oil

ईरानी क्रूड क्यों है रिफाइनरियों की पहली पसंद?

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान का कच्चा तेल 'रिफाइनिंग' यानी साफ करने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। तकनीकी भाषा में कहें तो यह तेल न बहुत ज्यादा भारी होता है और न ही इसमें बहुत ज्यादा गंदगी (सल्फर) होती है। इसे प्रोसेस करना रिफाइनरियों के लिए बेहद आसान और किफायती पड़ता है। जब इस तेल को साफ किया जाता है, तो इससे पेट्रोल, डीजल और एविएशन फ्यूल (हवाई जहाज का ईंधन) जैसे कीमती उत्पाद अधिक मात्रा में और कम लागत में निकलते हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद दुनिया भर की बड़ी रिफाइनरियां किसी न किसी रास्ते से ईरानी तेल हासिल करने की कोशिश करती हैं, क्योंकि इससे उनका मुनाफा बढ़ जाता है।

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