CIBIL रिपोर्ट में दिख रहे Written Off का क्या है मतलब? 7 साल तक रहता है असर!

अगर आपकी रिपोर्ट में यह स्टेटस आ गया है, तो अगले 7 सालों तक आपको नया लोन या क्रेडिट कार्ड मिलना लगभग नामुमकिन हो सकता है। आइए बताते हैं आखिर ये क्या है और क्यों आपका पीछे नहीं छोड़ता है?

जब आप बैंक से लोन लेते हैं या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो समय पर किश्तें चुकाना आपकी जिम्मेदारी होती है। लेकिन कई बार आर्थिक तंगी या अन्य कारणों से लोग महीनों तक भुगतान नहीं कर पाते। ऐसी स्थिति में आपकी CIBIL रिपोर्ट में एक शब्द दिखाई देने लगता है 'Written Off'। यह शब्द सुनने में भले ही साधारण लगे, लेकिन बैंकिंग की दुनिया में यह आपकी वित्तीय साख पर सबसे बड़ा दाग माना जाता है। अगर आपकी रिपोर्ट में यह स्टेटस आ गया है, तो अगले 7 सालों तक आपको नया लोन या क्रेडिट कार्ड मिलना लगभग नामुमकिन हो सकता है। आइए बताते हैं आखिर ये क्या है और क्यों आपका पीछे नहीं छोड़ता है?

Cibil Report Written Off

क्या होता है 'Written Off' स्टेटस?

सरल भाषा में कहें तो जब बैंक को यह लगने लगता है कि किसी ग्राहक से लोन की वसूली करना अब संभव नहीं है, तो वह उस बकाया राशि को अपने बही-खाते (Ledger) से हटा देता है। जब कोई ग्राहक लगातार 180 दिनों (6 महीने) तक ईएमआई या क्रेडिट कार्ड का बिल नहीं भरता, तो बैंक उसे NPA (Non-Performing Asset) घोषित कर देता है। इसके बाद भी अगर वसूली नहीं होती, तो बैंक उस रकम को 'Written Off' यानी 'बट्टे खाते' में डाल देता है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि ग्राहक को अब पैसा नहीं चुकाना है; बल्कि इसका मतलब यह है कि बैंक ने उस लोन को अपना 'नुकसान' मान लिया है।

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