आज के समय में जब हम रसोई या गाड़ी की बात करते हैं, तो गैस का नाम सबसे पहले आता है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जो गैस आपके किचन के सिलेंडर में है, जो पाइप से आ रही है और जो आपकी कार की टंकी में भरी जाती है इन तीनों में क्या अंतर है? अक्सर लोग LPG, PNG और CNG को एक ही समझ लेते हैं, जबकि इनकी बनावट, इस्तेमाल और सप्लाई का तरीका बिल्कुल अलग है। ऐसे में आइए बताते हैं एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी में क्या है अंतर? और ये तीनों गैस कहां से आती है?
एलपीजी क्या है?
सबसे पहले बात करते हैं LPG (Liquefied Petroleum Gas) की। यह वही गैस है जो हमारे घरों के 'लाल सिलेंडर' में होती है। इसे 'तरल पेट्रोलियम गैस' भी कहते हैं क्योंकि इसे बहुत अधिक दबाव (Pressure) पर तरल बनाकर सिलेंडर में भरा जाता है। यह मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का मिश्रण होती है। एलपीजी हवा से भारी होती है, इसलिए रिसाव होने पर यह जमीन की सतह पर बैठ जाती है।
PNG का मतलब
वहीं, PNG (Piped Natural Gas) वह गैस है जो अब बड़े शहरों में सीधे पाइप के जरिए आपके चूल्हे तक पहुंचती है। यह मुख्य रूप से 'मीथेन' गैस होती है। पीएनजी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हवा से हल्की होती है, इसलिए रिसाव होने पर यह तुरंत हवा में ऊपर उड़ जाती है, जिससे आग लगने का खतरा एलपीजी के मुकाबले कम होता है। इसके लिए आपको सिलेंडर खत्म होने या बुकिंग का इंतजार नहीं करना पड़ता।
CNG क्या है?
तीसरी प्रमुख गैस है CNG (Compressed Natural Gas)। इसका उपयोग मुख्य रूप से वाहनों (कारों, बसों और ऑटो) में ईंधन के तौर पर किया जाता है। सीएनजी और पीएनजी दोनों ही 'नेचुरल गैस' के रूप हैं, लेकिन सीएनजी को बहुत ज्यादा कंप्रेस (दबाव) करके छोटे सिलेंडर में भरा जाता है। यह पेट्रोल और डीजल के मुकाबले काफी सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन है। जहां एलपीजी को रिफाइनरी में तेल शुद्धिकरण के दौरान बनाया जाता है, वहीं पीएनजी और सीएनजी प्राकृतिक रूप से जमीन और समुद्र के नीचे से निकाली जाती हैं।
कहां से आती हैं ये गैस
अब सवाल उठता है कि भारत में यह गैस आती कहां से है? भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 50% से 55% हिस्सा आयात (Import) करता है। एलपीजी और नेचुरल गैस का एक बड़ा हिस्सा कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अमेरिका जैसे देशों से आता है। यह गैस विशाल समुद्री जहाजों के जरिए तरल रूप (LNG) में भारत के तटों तक पहुँचती है। भारत में दहेज (गुजरात), कोच्चि (केरल) और रत्नागिरी (महाराष्ट्र) जैसे स्थानों पर बड़े एलएनजी टर्मिनल्स हैं, जहाँ इस गैस को दोबारा गैस रूप में बदला जाता है। भारत के भीतर भी ओएनजीसी (ONGC) और रिलायंस जैसी कंपनियां बॉम्बे हाई और कृष्णा-गोदावरी बेसिन जैसे समुद्री क्षेत्रों से प्राकृतिक गैस निकालती हैं।
सप्लाई चैन की बात करें तो भारत में गेल (GAIL) जैसी कंपनियां हजारों किलोमीटर लंबी पाइपलाइनों का जाल बिछा रही हैं ताकि विदेशों से आई गैस को देश के हर कोने तक पहुंचाया जा सके। यही पाइपलाइन नेटवर्क शहरों में पीएनजी की सप्लाई करता है और सीएनजी पंपों तक गैस पहुंचाता है। वर्तमान में रूस-यूक्रेन या मिडिल ईस्ट में होने वाले युद्धों का सीधा असर इन गैसों की कीमतों पर पड़ता है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार पर बहुत अधिक निर्भर है।
