Belated, Revised और Updated ITR में क्या है अंतर? कब कौन सा भरना चाहिए

आयकर विभाग के अनुसार असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन के बाद 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड और रिवाइज्ड ITR भरा जा सकता है। इसके अलावा, छूटी हुई आय की सही जानकारी देने के लिए 48 महीने के भीतर अपडेटेड ITR (ITR-U) दाखिल करने की सुविधा उपलब्ध है।

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की प्रक्रिया में अक्सर लोग डेडलाइन छूट जाने या फॉर्म भरते समय गलत जानकारी दर्ज हो जाने की समस्या से जूझते हैं। ऐसी स्थिति में इनकम टैक्स विभाग करदाताओं को राहत देने के लिए तीन मुख्य विकल्प प्रदान करता है बिलेटेड ITR (Belated ITR), रिवाइज्ड ITR (Revised ITR) और अपडेटेड ITR (Updated ITR)। हालांकि, ज्यादातर लोग इन तीनों के बीच के अंतर को लेकर असमंजस में रहते हैं। सही जानकारी के अभाव में गलत फॉर्म चुनने से भारी जुर्माना लग सकता है या रिफंड अटक सकता है।

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Belated, Revised और Updated ITR में क्या है अंतर?

बिलेटेड ITR क्या है?

पहला विकल्प है बिलेटेड ITR (Belated ITR), जो तब भरा जाता है जब आप 31 जुलाई की तय डेडलाइन तक अपना ओरिजिनल ITR जमा नहीं कर पाते हैं। यदि आप नियत तारीख तक रिटर्न नहीं भर सके हैं, तो आप धारा 139(4) के तहत 31 दिसंबर तक बिलेटेड रिटर्न फाइल कर सकते हैं। हालांकि, देर से रिटर्न दाखिल करने पर धारा 234F के तहत पेनल्टी चुकानी पड़ती है। जिन करदाताओं की सालाना कमाई ₹5 लाख से अधिक है, उन्हें ₹5,000 की लेट फीस देनी होती है, जबकि ₹5 लाख से कम आय वालों के लिए यह पेनल्टी ₹1,000 तय की गई है।

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