H-1B Visa, PERM और Green Card में क्या फर्क है? अमेरिका में नौकरी से लेकर परमानेंट सेटलमेंट तक, समझें पूरा प्रोसेस

अमेरिका में नौकरी पाने से लेकर वहां स्थायी रूप से बसने तक H-1B Visa, PERM और Green Card की अहम भूमिका हो सकती है। लेकिन ये तीनों एक जैसे नहीं हैं। जानिए इनके बीच क्या अंतर है, आवेदन कैसे होता है और भारतीय कर्मचारियों के लिए कौन-सी प्रक्रिया जरूरी हो सकती है।

H-1B Visa अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को विशेष कौशल वाली नौकरियों में अस्थायी रूप से काम करने की अनुमति देता है। इसका इस्तेमाल खासतौर पर IT, इंजीनियरिंग, साइंस और तकनीकी क्षेत्रों में होता है। इस वीजा के लिए आमतौर पर अमेरिकी कंपनी को कर्मचारी की ओर से आवेदन करना पड़ता है। नौकरी के लिए संबंधित क्षेत्र में विशेष ज्ञान और आमतौर पर बैचलर डिग्री या उसके बराबर योग्यता की जरूरत होती है। H-1B की शुरुआती अवधि अधिकतम तीन साल हो सकती है और सामान्य परिस्थितियों में इसे बढ़ाकर कुल छह साल तक किया जा सकता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में इससे अधिक समय तक भी विस्तार संभव है। हालांकि, H-1B मिलने का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारी को अमेरिका में हमेशा रहने का अधिकार मिल गया है।

Visa Difference

H-1B Visa, PERM और Green Card में क्या फर्क है?

PERM क्या है और इसकी जरूरत क्यों पड़ती है?

PERM का पूरा नाम Program Electronic Review Management है। यह अमेरिकी श्रम विभाग की स्थायी लेबर सर्टिफिकेशन प्रक्रिया है। जब कोई अमेरिकी कंपनी किसी विदेशी कर्मचारी को स्थायी नौकरी पर रखना चाहती है, तो कई मामलों में उसे पहले PERM प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। इसमें कंपनी को यह साबित करना होता है कि संबंधित नौकरी के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी को नौकरी देने से अमेरिकी कर्मचारियों की सैलरी तथा काम करने की परिस्थितियों पर गलत असर नहीं पड़ेगा।

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