Active vs Passive Fund : म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश करते समय आपके सामने बहुत सारे ऑप्शन होंगे। इनमें दो ऑप्शन खास तौर पर आपके सामने आएंगे कि आप एक्टिव फंड (Active Fund) में निवेश करना चाहते हैं या फिर पैसिव फंड (Passive Fund) में।
म्यूचुअल फंड की एक्टिव और पैसिव स्कीम में कई अंतर हैं
निवेश का फैसला लेने से पहले, फंड के परफॉर्मेंस, फीस और खर्चों की जानकारी लेने के साथ-साथ ये भी तय करना जरूरी है कि आपके लिए एक्टिव या पैसिव फंड में कौन सी स्कीम बेहतर रहेगी।
क्या होते हैं एक्टिव फंड (Active Fund)
ग्रो के अनुसार एक्टिव म्यूचुअल फंड को एक प्रोफेश्नल फंड मैनेजर मैनेज करता है। ये फंड मैनेजर बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर परफॉर्म करने या बाजार से तगड़ा रिटर्न जनरेट करने के लिए एक्टिवली यानी सक्रिय तौर पर पोर्टफोलियो में एसेट्स को सेलेक्ट और मैनेज करता है। फंड मैनेजर सबसे बेहतर निवेश अवसरों की पहचान करने के लिए अलग-अलग इंवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी का उपयोग करते हैं।
पैसिव फंड (Passive Fund)
दूसरी तरफ पैसिव फंड में निवेशकों को न्यूनतम जोखिम के साथ अच्छा रिटर्न मिलने की उम्मीद रहती है। इंडेक्स फंड जैसे पैसिव फंड एक स्पेसिफिक मार्केट इंडेक्स, जैसे निफ्टी 50 या निफ्टी 500, के परफॉर्मेंस को ट्रैक करने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। इसमें उन्हीं सिक्योरिटीज में निवेश किया जाता है, जो उस इंडेक्स में हों।
क्या है बड़ा अंतर
एक्टिव फंड में फंड मैनेजर की भूमिका अहम रहती है, क्योंकि उस पर लगातार फंड को चलाने की जिम्मेदारी होती है। वहीं कम मैनेजमेंट की जरूरत के कारण पैसिव फंड में मैनेजमेंट फीस भी कम लगती है।
पैसिव फंड का नुकसान
पैसिव फंड्स का रिटर्न बहुत अधिक नहीं होता है। इनका रिटर्न बेंचमार्क के रिटर्न के बराबर या उससे कम हो सकता है। वहीं एक्टिव फंड किसी इंडेक्स को फॉलो नहीं करते। इसलिए उनमें जोखिम थोड़ा ज्यादा होता है, पर अधिक रिटर्न की उम्मीद भी होती है।
जो लोग जोखिम लेकर अधिक रिटर्न चाहते हैं वे एक्टिव फंड चुन सकते हैं। मगर कम जोखिम वालों के लिए पैसिव फंड सही हो सकते हैं।
डिस्क्लेमर : यहां मुख्य तौर पर म्यूचुअल फंड की कैटेगरियों की जानकारी दी गई है, निवेश की सलाह नहीं। म्यूचुअल फंड में जोखिम होता है, इसलिए निवेश अपने जोखिम पर करें। निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की राय जरूर लें।
